
होशियारपुर शहर में करीब 20-25 साल पहले हिमाचल प्रदेश से संबंधित लोगों द्वारा एक संस्था बनाकर बहादुरपुर इलाके में लाखों रुपये खर्च करके हिम भवन बनाया गया था। शुरु-शुरु में तो इसमें कार्यक्रम करवाए गए, लेकिन बाद में आम जनता की तो दूर हिमाचल प्रदेश से संबंधित लोगों को भी इसका कोई लाभ नहीं मिला। पता चला है कि प्रबंधकों ने इस हाल को किराये पर दे दिया था और शहर की ही एक नामी फर्म ने इसे किराये पर लेकर यहां पर सामान स्टोर कर दिया था। लेकिन कुछ समय पहले कुछ लोगों ने जब इसके बारे में आपत्ति जताई तो प्रबंधकों द्वारा इसे खाली करवा लिया गया।

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लेकिन आज तक इस संस्था ने बैठक करके हाल पर हुए खर्च तथा किराये से हुई आमदन संबंधी कोई ब्यौरा जनता के समक्ष पेश नहीं किया। अगर प्रबंधक यह खर्च या आमदन सार्वजनिक नहीं भी करना चाहते तो कम से कम अपने समस्त सदस्यों को बुलाकर ही इसका ब्यौरा दे देते तो शायद आज विरोध के स्वर प्रखर न होते। सूत्रों से पता चला है कि हाल को सार्वजनित प्रयोग एवं जनता को इसका लाभ मिले के लिए कुछ लोगों द्वारा प्रबंधकों से हिसाब मांगा जा रहा है तथा यह भी पता चला है कि प्रबंधकों में भी एकाधिकार के चलते कोई भी सदस्य आवाज उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। लेकिन जो सदस्य अब यह मामला उठाने की मन बना चुके हैं उनका कहना है कि जब तक यह इमारत जनता को पूरी तरह से समर्पित नहीं कर दी जाती तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे। उनकी माने तो उनके द्वारा शोर मचाए जाने पर प्रबंधकों में हलचल तो शुरु हो चुकी है, मगर अब देखना यह है कि जनता के रुपये से बनी इस इमारत को जनता के लिए कब खोला जाएगा। इतना ही नहीं कई बार बस या कोई अन्य वाहन न मिलने से हिमाचल के कई लोगों को बस स्टैंड पर रात गुजारने को विवश होना पड़ता है या फिर किसी होटल में पैसे खर्च करके रात गुजारनी पड़ती है। अगर इस हाल में बने कमरे ऐसे मुसाफिरों के लिए खोल दिए जाएं तो उन्हें काफी सुविधा मिल सकती है। लेकिन इस तरफ आज तक किसी ने ध्यान नहीं दिया।












