कौन मारेगा मौके पे चौकाः पार्टी भाजपा नेता छोड़ रहे हैं और कांग्रेस छोड़ आप में गए नेताओं के खेमे में खुशी के चर्चे

एक तरफ पंजाब में कई हलकों में अलग-अलग पार्टियों के नेता एवं कार्यकर्ता अपनी पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हो रहे हैं तो होशियारपुर में अपनी ही पार्टी के एक गुट के नेताओं की मनमर्जी एवं एकाधिकार से नाराज चल रहे नेताओं द्वारा त्यागपत्र दिए जाने का दौर जारी है। पता चला है कि पार्टी के बड़े नेता उन्हें मनाकर पार्टी में बने रहने का दवाब बनाने में जुटे हुए हैं, पर वह कितना कामयाब हो पाते हैं यह तो समय ही बताएगा। फिलहाल भाजपा की अंतरकल्ह जगजाहिर हो रही है। परन्तु इस बात की इतनी खुशी भाजपा के उस गुट को भी नहीं हो रही होगी, जिनके कारण उन्हें पार्टी छोड़ने को विवश होना पड़ रहा है, जितनी खुशी कांग्रेस पार्टी को छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं और उनके समर्थकों को हो रही है। उन्हें लगता है कि यही मौका है भाजपा छोड़ने वालों को अपने साथ मिलाकर अपनी ताकत बढ़ाने का।

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इसलिए उनके द्वारा पार्टी छोड़ रहे नेताओं को आपके साथ चलाने में मनाने का हर हथकंडा अपनाने की योजनाएं प्रवलता से जारी हैं। क्योंकि, वह जानते हैं कि भाजपा छोड़ने वाले नेताओं एवं पदाधिकारियों का शहर व आसपास के गांवों में अच्छा खासा रसूख है और एक बड़ा वोट बैंक उनके इशारे के इंतजार में खड़ा है। इसलिए वह इस मौके पर चौका मारने का यह मौका नहीं छोड़ना चाहते। सूत्रों की माने तो भले ही पार्टी छोड़ने वाले नेताओं ने अभी अगली रणनीति संबंधी कोई फैसला नहीं लिया है, मगर आप में शामिल होने वाले कांग्रेसियों को लगता है कि अगर यह नेता उनके साथ आ जाएं तो उनकी हिटकोले खाती नैय्या को वो सहारा मिल सकता है, जो उनकी नैय्या को पार लगाने के लिए राम बाण का काम कर सकता है। इसलिए उनके द्वारा नेताओं को लुभाने और उनके और समर्थकों पर पार्टी छोड़ने का दवाब बनाने जैसी योजनाओं पर अंदरखाते काम कब से शुरू हो चुका है, जिसका सबसे अधिक नुकसान भाजपा को ही उठाना पड़ सकता है की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तो इस बात की भी है तथा कुछेक ने दबी जुबान में यहां तक कहने से भी परहेज नहीं किया कि जो लोग कांग्रेस छोड़ आप में गए थे, उनमें से अधिकतर का चाव कुछ ही दिनों में पूरा हो गया तथा अब उनका प्यार एवं रुझान फिर से अपनी मां पार्टी के प्रति जागता हुआ दिखाई दे रहा है। पार्टी मोह से बंधे कई नेता एवं कार्यकर्ता कहीं न कहीं वहां भी पैर फंसाए नज़र आ रहे हैं तो ऐसे में कहा जा सकता है कि ‘आप’ तो ‘आप’ के भी न हुए, तो दूसरों को क्या सम्मान दिला पाओगे। वैसे भी इन दिनों आप के एक नेता जी काफी चर्चा है। क्योंकि, उन्होंने हाल में कुछ लोगों को आप में शामिल करवाया था तथा कुछ ही दिन बाद उनके इलाकों में उनके ही प्रतिद्वंदियों के यहां बैठकें करके उन्हें इशारा कर दिया कि वह उनके लिए सिर्फ मोहरे हैं, उनके करीबी तो कोई और ही हैं। वैसे स्वाद चखने वालों में कुछ भाजपा से जुड़े हुए भी शामिल बताए जा रहे हैं।

खैर फिलहाल राजनीतिक माहिरों की माने तो ऐसे समय में भाजपापार्टी हाईकमान को चाहिए कि वह समय रहते इस डैमेज को कंट्रोल करके पार्टी व पार्टी नेताओं से नाराज नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को संभाले ताकि उनके द्वारा पार्टी हाईकमान को दिखाए जा रहे उनके भी सपने अमली जामा पहल सकें। अन्यथा कांग्रेस से आप के हुए खेमे उनके अनुभव और जनाधार का लाभ उठाने में कामयाब हो सकते हैं। हालांकि यह अदला बदली का दौर 31 मई तक ही मान्य कहा जा सकता है। क्योंकि 1 जून को मतदान है और 4 को तो हार-जीत का जिन सबके सामने होगा। लेकिन, समय रहते स्थिति न संभाली गई तो भाजपा को इसके दूरगामी परिणाम भुगतने से कोई नहीं रोक सकता, यह भाजपा के चकसाली नेताओं का कहना है। अब देखना यह होगा कि भाजपा आला कमान इन दरारों को भरने में कितनी कामयाब हो पाती है या फिर त्यागपत्रों का यह सिलसिला यूं ही जारी रहता है, जैसा कि वो और वो चाहते हैं। अब वो और वो कौन है इसके बारे में आप सब जानते हैं। बस आपकी मेरे मुंह से सुनने की आदत नहीं गई। पहले कभी बताया है जो आज बताऊंगा। मुझे दें इजाजत। जय राम जी की।

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