Saturday, October 10, 2026
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भाजपा को वोट न डालने वालों को गलत बोलने एवं लिखने वालों को मानसिक संतुलन चैक करवाना चाहिए: एडवोकेट बेदी

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। अयोध्या जी में भाजपा की हार के साथ-साथ देश के अन्य कोनों में जहां से भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है से आहत भाजपा कार्यकर्ता व उससे जुड़े संगठनों के लोगों द्वारा भाजपा को वोट न करने पर अनाप-शनाप बोला जा रहा है तथा सोशल मीडिया पर भी कई प्रकार की समाज को तोड़ने वाली पोस्टें डाली जा रही हैं। यह उन लोगों का भी अपमान है जिन्होंने भाजपा को वोट दिया था। ऐसे लोगों से आह्वान है कि वह हार से बौखलाएं नहीं बल्कि अपने खो चुके मानसिक संतुलन का चैकअप करवाएं। यह बात गांव सलेरन के पूर्व सरपंच एवं आप नेता एडवोकेट नवजिंदर सिंह बेदी ने आज यहां जारी एक प्रैस विज्ञप्ति में कही। उन्होंने कहा कि भगवान राम सभी के हैं और हर भारतीय के हृदय में उनका वास है। भगवान राम को लाने वाले यह भूल गए थे कि वे भगवान से हैं न कि भगवान उनसे नहीं। परन्तु अहंकार में डूबे भाजपा वालों और उनके सहयोगी संगठनों के लोग भूल गए थे कि जिस राम की वजह से उनका अस्तितिव है वे उसे भी अपना कार्यकर्ता समझने लगे।

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एडवोकेट बेदी ने कहा कि भाजपा की नीतियां और नीयत अगर ठीक होती तो उसे इतनी बड़ी हार का मुंह न देखना पड़ता, लेकिन लोगों को धर्म के नाम पर बांटने वाली भाजपा अपने ही मुंह गिरी तथा हार के बाद उसके समर्थकों द्वारा भाजपा को वोट न देने वालों को अपशब्द बोलना तर्गसंगत नहीं है। क्योंकि, लोकतंत्र में हरेक नागरिक को अपना नेता एवं प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि उक्त सभी लोगों को आत्म मंथन करके अपने आप में सुधार करना चाहिए न कि दूसरों को गलत बोल कर समाज में नफ्तर फैलाने का काम करना चाहिए। और तो और कुछ लोगों द्वारा अयोध्या जी जाकर वहां के लोगों से कोई भी सामान न खरीदने की अपीलें भी की जा रही हैं, जो सरासर गलत हैं तथा वह उनकी कड़ी निंदा करते हैं। केन्द्र में मोदी सरकार का गठन जैसे तैसे ही होगा तथा विपक्ष भी पूरी मजबूती के साथ खड़ा है और हो सकता है कि विपक्षी पार्टियां ही सरकार बना जाएं। इसलिए मानसिक संतुलन को बनाए रखना जरीर है, क्योंकि चुनाव तो आते जाते रहते हैं और हमें आपसी एकता एवं अखण्डता को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। परन्तु हार की बौखलाहट का यह अर्थ नहीं कि भाजपा या उसके समर्थकों को किसी को भी कुछ भी कहने का अधिकार मिल जाता है।

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