
हमीरपुर (द स्टैलर न्यूज़), रजनीश शर्मा। गुरु का शिक्षा और परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान प्राचीन काल से ही भारत के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन का हिस्सा रहा है। भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी ऊपर का दर्जा प्राप्त है। स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था कि वे अपने जीवन के लिए अच्छे पिता के ऋणी हैं, मगर अच्छे जीवन के लिए अपने गुरु के। इसी भावना के अनुरूप, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टौणी देवी में भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन (5 सितंबर) पर शिक्षक दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में बच्चों में सुबह से ही उत्साह देखने को मिला। उन्होंने अपने प्रिय शिक्षकों को ग्रीटिंग कार्ड, उपहार और केक काटकर सम्मानित किया। शिक्षकों ने भी बच्चों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए डा. राधाकृष्णन के पदचिन्हों पर चलने की प्रेरणा दी। विद्यालय को सुंदर ढंग से सजाया गया था, जिससे उत्सव का माहौल और भी आनंदमय हो गया। इसके साथ ही विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों के बीच प्रथम शिक्षण संवाद का आयोजन हुआ। इसमें प्रथम टर्मिनल परीक्षा के परिणामों, स्वच्छता पखवाड़ा, ‘मेरा स्कूल मेरा अभिमान’ अभियान, विद्यालय में चल रहे विकास कार्यों और जिला स्तरीय अंडर-19 लड़कों की खेलकूद प्रतियोगिता, जो 24 सितंबर से आयोजित होने वाली है, पर विस्तार से चर्चा की गई। मध्यान्ह भोजन में अभिभावकों द्वारा दिए गए तिथि भोजन सहयोग के लिए भी धन्यवाद किया गया।
प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा ने डा. राधाकृष्णन के जीवन दर्शन का वर्णन करते हुए कहा कि उनके शिक्षा क्षेत्र में योगदान को संपूर्ण विश्व आज भी स्मरण करता है। उन्होंने विद्यार्थियों में अनुशासन के महत्व पर जोर दिया और कहा कि अगर शिक्षा सही ढंग से दी जाए, तो समाज की बुराइयां नष्ट हो जाएंगी। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे कक्षा में पाठ्यक्रम के अलावा जीवन जीने की कला के बारे में भी बच्चों को रोज़ जानकारी दें, क्योंकि शिक्षक ही बच्चों के रोल मॉडल होते हैं। प्रधानाचार्य ने अभिभावकों के संवाद में आने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एक विद्यार्थी की शिक्षा में माता-पिता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षक विजय कुमार, लीना और प्रधान रमन मल्कानिया ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि विद्यालय में सकारात्मक बदलाव के लिए बच्चों, शिक्षकों और समुदाय के बीच संवाद का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन द्वारा उठाए जा रहे कदमों की सराहना की और आशा व्यक्त की कि आने वाला कल विद्यालय के लिए स्वर्णिम होगा।











