
कपूरथला (द स्टैलर न्यूज़), गौरव मढ़िया। कौन कौन गाँव देवता कहा से आप पधारे है, जाहिर में तो घोर तवस्वी, फिर शस्त्र क्यों कर धारे है। इधर तुम्हारी युवा अवस्था, उधर फकीरी बाना है। क्या कारन बन में फिरने का, अस्ली कौन ठिकाना है, यह उदगार श्री हनुमान जी ने श्री प्रताप धर्म प्रचारणी राम लीला दशहरा कमेटी द्धारा बुधबार की सांय को देवी तालाव और रात्रि को शालीमार बाग में मंचित नाटक हनुमान मिलाप में उस समय कहे श्री हनुमान जी प्रभु श्री राम और लक्ष्मन को मिलने से पहले उनका परिचय पूछते है और जब उनको यह पता चलता है कि बनवासी बस्त्रों में उनके अराघ्य देव प्रभु राम है दृश्य में प्रभु राम के अनन्य भक्त हनुमान से प्रभु राम की भेंट होते ही पंडाल में बोल सीयापति राम चंद्र महाराज की जय, बोलो जय बजरंगी बली हनुमान की जयकारे गूंजते है। इस मंचित नाटक का शुभारंभ चार्टड अकाऊंटैंट बिरज भूषन शर्मा ने अपने कर कमलों से किया। और देबी तालाब के मैदान में श्री हनूमान जी का स्बागत उनके भक्त चेयरमेन, प्राचीन पंच मुखी शिब मंदिर कचहरी चौंक ने अपने कर कमलों से किया। मंदिर प्रभु श्री राम से मिलने के बाद वीर बजरंग बली प्रभु श्री राम को अपने महाराज सु्ग्रीव के पास ले जाते है।

दोनो प्रभु श्री राम और सुग्रीव एक दूसरे को अपनी अपनी ब्यथा सुनाते है तो एक दूसरे की सहायता के लिए तैयार हो जाते है। सुग्रीव श्री राम को माता सीता के आभूषन दिखाते है और बताते है यह आभूषन उसको तब मिले जब लंकापति रावन अपने पुष्पक बिमान से एक देवी को आकाश मार्ग से दक्षिन दिशा की और लेकर जा रहा था और देवी यह आभूषन नीचे गिरा रही थी। माता सीता की खोज करने के लिए प्रभु श्री राम श्री हनुमान जी को दक्षिन दिशा की और भेजते है। वहीं पवन पुत्र हनुमान सीता माता की तलाश करते हुए लंका के उस बगीचे में जा पहुंचते है,जहां पर सीता माता एक पेड़ के नीचे बैठी विश्राम कर रही होती है तो हनुमान सीता माता को मिलकर धैर्य देते है और कहते है कि उन्हें पापी रावण से घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
हनुमान जलपान के लिए अशो बाटिका को उजाड देते है और जब रावन का पुत्र अक्षय कुमार हनुमान जी को ललकारता है तो श्री हनुमान जी अक्षय कुमार का बध कर देते है और रावन का पराक्रमी पुत्र मेघनाद श्री हनुमान जी को शकित का प्रयोग कर बाँध कर लंकापति रावन के दरबार में पेश करता है तो लंकापति रावन और श्री हनुमान के मघ्य जोरदार संबाद होता है और गुस्से में आकर रावन सैनिकों को श्री हनुमान की पूंछ को आग लगाने का दंड देने को कहते है और श्री हनुमान अपनी पूंछ में लगी आग से लंका को जला डालते है और इस दृश्य से लीला सपन्न हो जाती है। रावण का जानदार किरदार मंझे हुए कलाकार पवन कालिया , श्री राम का अभिनय विनय शर्मा व लक्ष्मन का अभिनय अंकुर महाजन व मेधनाद का अभिनय अक्षत कालिया ने किया। इस अवसर पर सभा के अध्यक्ष सुरिंदर शर्मा, सतीश शर्मा, रजिंदर वर्मा, राजेश सूरी, कष्न लाल सर्राफ, ऐडवोकेट पवन कालिया, मंगल सिंह, बिशंवर दास, गुलशन लुंबा, दबिंदर कालिया, भूपिंदर सिंह, बावा पंडित, जोगिंदर जेके, पुलकित सूरी, अक्षत कालिया, मनीश कुमार, रधु शर्मा, पवन लुंबा, भूपिंदर सिंह, तनुज महाजन, व दर्जनों कलाकार उपसिथत थे।












