
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। कुछ महीने पहले डिप्टी कमिश्नर और नगर निगम कमिश्नर के ध्यान में यह बार बार लाया गया कि एसपीए में पशुओं की सेवा के नाम पर जो अस्पताल चल रहा है उसकी दुर्गति है। वह उजड़ी हुई हवेली की तरह केवल कुत्तों की चीख पुकार से भरी है। उसकी बिल्डिंग अच्छी नहीं। कुत्तों के अतिरिक्त किसी और पशु का वहां इलाज संभव नहीं। कोई और साधारण छोटा पशु वहां रख दिया जाए तो उसे कुत्तों द्वारा नोंचे जाने का खतरा हर समय रहता है। वहां का नगर निगम द्वारा नियुक्त स्टाफ काफी परेशान है, पर आश्चर्य है कि इस विभाग के मंत्री को लिखने के बाद नगर निगम कमिश्नर को सारी दुखद कहानी बताने के बाद डिप्टी कमिश्नर की प्रतिनिधि आईएएस अधिकारी को उसकी दयनीय हालत दिखाने के बाद भी वहां कुछ नहीं हुआ। यह अवश्य हो गया कि जिन लोगों के कारण वहां कुुत्तों का कब्जा करवाया हुआ है उन्होंने प्रदर्शन करके मेडिकल स्टाफ को अवश्य परेशान किया।

पंजाब का पशुपालन विभाग पूरी तरह इस अस्पताल और एसपीसीए केंद्र से आंखें बंद करके बैठा है। इसका भवन नगर निगम ने बनाना है और सामाजिक कार्यकर्ताओं की नोमिनेशन डिप्टी कमिश्नर ने करनी है। आश्चर्य है कि 2010 में जो तत्कालीन डीसी ने जो सदस्य मनोनीत किए वही आज तक चल रहे हैं। पशुओं के हित के नाम पर वहां क्या हो रहा है किसी की जुूर्रत नहीं कि यह देखे और गलत काम रोक सके। क्या मुख्यमंत्री अपने अमृतसर प्रवास के दौरान यहां आकर पशुओं केा राहत देंगे। श्री दुर्ग्याणा मंदिर तो कई बार मुख्यमंत्री आए पर मंदिर के साथ ही बने पशुओं के लिए उपचार केंद्र नहीं पीड़ा केंद्र में जाने का उन्हें समय नहीं। शायद उन्हें पता ही नहीं होगा कि यहां कोई अस्पताल है।











