
पलक, विशेष संवाददाता (द स्टैलर न्यूज़)। भारत में 26 जनवरी यानि गणतंत्र दिवस का खास महत्व है। यह देश का दूसरा बड़ा पर्व है। पहला पर्व स्वतंत्रता दिवस के रुप में मनाया जाता है। गणतंत्र दिवस गण के तंत्र का दिवस है तथा यह हमारे देश की स्वतंत्रता और अखंडता को एक सूत्र में पिरोकर रखता है। इस दिन राष्ट्रपति राजपथ पर झंडा फहराते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गणतंत्र दिवस को मनाने के लिए 26 जनवरी की तारीख ही क्यों चुनी गई। अगर नहीं पता तो हम बताते हैं। इतिहास के पन्नों से मिली जानकारी अनुसार संविधान सभा की मांग पहली बार साल 1895 में बाल गंगाधरतिलक ने उठाई थी। जिसके बाद 1928 की नेहरू रिपोर्ट, 1935 का भारत शासन अधिनियम और कई अन्य दस्तावेजों ने भी संविधान की आवश्यकता का जिक्र किया। जिसके बाद 1925 में महात्मा गांधी की अध्यक्षता में कामनवेल्थ ऑफ इंडिया बिल पेश किया गया। जो कि भारत के लिए संवैधानिक प्रणाली की रूपरेखा प्रस्तुत करने की पहली कोशिश थी।
देश के नियमों और कानूनों को बनाने के लिए 6 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की स्थापना हुई। इस सभा ने 2 साल 11 महीने और 18 दिन में देश का संविधान बनाकर तैयार कर दिया। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने भारतीय संविधान को स्वीकार किया और उसकी कुछ धाराओं को लागू भी किया गया। भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हो चुका था। हालांकि, 26 जनवरी की महत्ता को देखते हुए 1950 में इसी दिन संविधान लागू किया गया।
भारत देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 26 जनवरी 1950 में 21 तोपों की सलामी के साथ झंडा फहराया था और भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया था। तब से हर साल इस दिन गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय पर्व के तौर पर मनाया जाता है।
देश के राष्ट्रपति इस दिन कार्यक्रम में शामिल होकर बतौर भारत के पहले नागरिक एवं मुख्य अतिथि के रुप में झंडा फहराते हैं। गणतंत्र दिवस भारत के लोकतांत्रिक शासन और संविधान की शक्ति को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है।
यह दिन देश की एकता और शक्ति का भी प्रतीक है, जो हमें हमारे अधिकारों एवं कर्तव्यों की याद भी करवाता है। यह दिन यह दर्शाता है कि भारत एक लोकतांत्रिक और गणराज्य देश है, जहां की सरकार जनता द्वारा चुनी जाती है। इस दिन का महत्व यह भी है कि यह भारतीय जनता की स्वतंत्रता और समानता के मूल्यों का प्रतीक है।











