
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। भारत सरकार वर्ष 2025-26 के लिए बजट पेश कर रही है। मेरा निर्मला सीतारमण जी से यह कहना है कि जो बजट की किताब आपने बना ली वह तो आप कल लोकसभा में पेश कर देंगी, लेकिन बजट पास करने से पहले उन लोगों का ध्यान जरूर करें जो आज भी हिंदुस्तान में दो तीन सौ रुपये रोज के कमा रहे हैं और उनको चालीस रुपये किलो आटा और दो सौ रुपये किलो तेल लेकर अपना परिवार पालना पड़ता है। एक तरफ तो सरकार अस्सी करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दे रही है, पर शेष लोगों ने क्या गुनाह किया कि उनको चालीस रुपये किलो का आटा खाना पड़ रहा है। जो लोग इनकम टैक्स देते हैं, सारा बोझ उन्हीं पर पड़ता है। इस बार मध्यम वर्ग को राहत दीजिए। इनकम टैक्स कम करें। हैरानगी है कि अपने देश में सारी सुविधाएं केवल उन लोगों को मिलती हैं जो कोई भी टैक्स नहीं देते। खास कर इनकम टैक्स नहीं देते। मेरा भारत सरकार से यह भी सवाल है कि अगर हम विकसित हो रहे हैं, हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है तो यह मुफ्त राशन लेने वाले अस्सी करोड़ लोगों की संख्या कब कम होगी। अगर अर्थ व्यवस्था मजबूत है तो लोगों को मुफ्त राशन क्यों देना पड़ रहा है।

असल में सरकारी चक्की में गरीब, मध्य वर्गीय पिसता है और जो बिल्कुल मुफ्तखोरी पर पलते हैं वे आराम से जी रहे हैं। सरकार इतना तो कर सकती है कि जो मुफ्त राशन लेते हैं और कई मुफ्त की रेवड़ियां बांटने में सभी राजनीतिक दल हैं, इतना तो प्रतिबंध लगा दें कि जो अपनी सारी कमाई शराब पर उड़ा देते हैं, उनको मुफ्त में कुछ न दिया जाए। आटा सस्ता करें, दाल तेल आम लोगों की पहुंच में करें। वैसे सरकार से यह भी सवाल है कि आपका लेबर कमीशन क्या काम करता है। जिन लोगों को पूरा वेतन नहीं मिलता, बड़े—बड़े अमीर जिनको थोड़ा वेतन देकर गरीबी की जिंदगी जीने को मजबूर करते हैं उन पर कोई नियंत्रण क्यों नहीं। सीधी बात यह कि पहले आटा दाल सस्ता करो, सबके लिए करो।











