Sunday, November 1, 2026
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पंजाब सरकार सेम को खत्म करने के लिए एक नई प्रौद्योगिकी परियोजना शुरू कर रही है: बरिंदर गोयल

फाजिल्का (द स्टैलर न्यूज़)। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार के मृदा एवं जल संरक्षण विभाग ने फाजिल्का जिले में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए नई तकनीक का एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया है। पंजाब सरकार इस पर 27 करोड़ रुपये खर्च करेगी और यह परियोजना 29 गांवों के किसानों के लिए वरदान साबित होगी। यह जानकारी पंजाब के जल संसाधन तथा भूमि एवं जल संरक्षण मंत्री बरिन्दर कुमार गोयल ने कल देर सायं अरनीवाला में विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान दी। इस अवसर पर जलालाबाद के विधायक जगदीप कंबोज गोल्डी भी विशेष रूप से उपस्थित थे। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की सहायता के लिए कृतसंकल्प है और इसीलिए भूमि एवं जल संरक्षण विभाग द्वारा यह नई तकनीक परियोजना तैयार की गई ताकि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों को विभाग की परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। इससे लगभग 5000 हेक्टेयर भूमि को लाभ होगा।

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उल्लेखनीय है कि फाजिल्का जिले के खुइयां सरवर, अबोहर और अरनीवाला ब्लॉक के कुछ गांवों में जलभराव की समस्या पैदा हो गई है। जिसके कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा था। इससे पहले जलभराव की समस्या के समाधान के लिए सेम नाले बनाये जाते थे या  मिट्टी के छिद्रित पाइपों का जाल बनाया जाता था जिसे धरती की सतह से 3-5 फीट नीचे गाड़ दिया जाता था, जिसके माध्यम से पानी को एकत्र कर एक स्थान पर एकत्र किया जाता था और वहां से उसे नाले में भेज दिया जाता था, लेकिन ये पाइपें कुछ ही समय में गाद से भर जाती थीं और इससे जलभराव का स्थायी समाधान नहीं हो पाता था। इस अवसर पर एसडीएम कंवरजीत सिंह मान भी उपस्थित थे। बॉक्स के लिए प्रस्तावित

नई तकनीक किस प्रकार भिन्न होगी?नई तकनीक के तहत हर 25 एकड़ जमीन पर 30-50 फीट गहरा बोरवेल-ट्यूबवेल लगाया जाएगा। ट्यूबवेल जलभराव वाली मिट्टी से पानी बाहर निकालेगा। यह ट्यूबवेल सौर ऊर्जा से संचालित होगा। इससे परियोजना का दैनिक खर्च नहीं होगा। प्रत्येक ट्यूबवेल को पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा और इस पानी को पास के नाले में छोड़ा जाएगा। इस परियोजना से जलभराव वाली मिट्टी को अधिक गहराई तक निकालने में मदद मिलेगी, जिससे बरसात के मौसम में भी जलभराव को रोका जा सकेगा। बॉक्स के लिए प्रस्तावित
मंडल भूमि संरक्षण अधिकारी गुरिंदर सिंह ने बताया कि यह पायलट प्रोजेक्ट गांव घल्लू, खुईखेड़ा, कबूलशाह खुब्बन, खियोवाली, लक्खेवाली, अलियाना, टाहलीवाला बोदला, घट्टियांवाली जट्टां, साजराना, कुहारियां वाली, बुर्ज हनुमानगढ़, सिंह पुरा, चहल वाली, घट्टियांवाली बोदला, पाकां , बन्ना वाला, आलमगढ़, सैयदवाला, कीकर खेड़ा, धर्म पुरा, ढाबा कोकरियां, धरंगवाला, बहादुर खेड़ा, काला टिब्बा, जोधपुर, रामगढ़, गद्दाडोब, रामसरा और दोतारांवाली में लागू किया जाएगा।

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