
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। पाकिस्तान के मौलाना जो टेलीविजन पर गाय का मांस खाने की वकालत करते दिखाई दिए उनको मैं यह समझाना चाहती हूं कि गाय का मांस खाने वाले कायर कमजोर होते हैं और शाकाहारी अधिक शक्तिशाली होते हैं। इस मौलाना ने यह कहने की जुर्रत कर दी कि वाघा बार्डर पर उनके सैनिकों की आवाज ज्यादा उंची है और लंबाई चौड़ी भी अधिक है। यह इसलिए हुआ क्योंकि वह गोश्त खाते हैं। मौलाना जी समझिए अगर गोश्त खाने वालों की ताकत देखनी है तो जनरल रियाजी को देखिए, जब सिर झुकाए वह भारत के जनरल के आगे हथियार डाल रहा था और उसके साथ ही आपके लगभग एक लाख गाय खाने वाले बहादुर आत्मसमर्पण कर रहे थे, लेकिन भारत के वीर सिर ऊंचा किए जश्न मना रहे थे। आपकी क्रिकेट टीम की क्या हालत हो रही है। वे भी तो यही काम करते हैं।


कारगिल की जंग का परिणाम याद होगा। इससे पहले सन 65 में भारत के वीरों ने किस तरह पाकिस्तान के तोप टैंकों की धज्जियां उड़ा दीं यह भूले नहीं होंगे। इसलिए ज्यादा अच्छा है कि अगर बहादुर बनना है केवल शरीर से नहीं आत्मा से तो गाय की हत्या, मांस खाना छोड़िए। वैसे तो ज्यादा अच्छा है शाकाहारी हो जाइए। याद रखिए हाथी शाकाहारी है और दुनिया में कहीं भी मोटर या मशीन लगानी हो तो हार्स पावर कहा जाता है, क्योंकि हार्स शाकाहारी है। अगर हम हिंदुस्तानियों से शाकाहारी बनना नहीं सीखना तो कम से कम पशुओं से ही सीख लीजिए। हमारे तो बंदर और लंगूर भी शाकाहारी हैं उनकी जैसी हाई जंप और लांग जंप कोई भी मांसाहारी नहीं कर सकता। चंदगी राम की बहादुरी शाकाहारी हिंदुस्तानी बेटे की एक बार पढ़ लेना।












