
नई दिल्ली (द स्टैलर न्यूज़)। लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पास होने के बाद राज्यसभा से भी पारित कर दिया गया है। बिल के समर्थन में 128 वोट पड़े। राज्यसभा की मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रपति के मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, अगर बिल को राष्ट्रपति मंजूरी देते है, तो यह कानून बन जाएगा। चर्चा के दौरान सरकार ने कहा कि अगर वह वक्फ संशोधन विधेयक नहीं लाती तो संसद भवन समेत कई इमारतें दिल्ली वक्फ बोर्ड के पास चली जातीं और कांग्रेस के शासनकाल में वक्फ संपत्तियों का सही से प्रबंधन होता तो केवल मुसलमानों की ही नहीं, बल्कि देश की तकदीर भी बदल जाती।

उच्च सदन में किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों पर मुस्लिम समाज को डराने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार सबका साथ, सबका विकास के नारे पर काम कर रही है। उन्होंने सभी को विश्वास दिलाते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय के धार्मिक कार्यकलापों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू ने सबसे पहले राज्य सभा में बहस की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड एक वैधानिक निकाय है और इसे हर हाल में धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए। इस बिल से गरीब मुसलमानों को काफी फायदा होगा। बहस के दौरान विपक्षी दलों की ओर से कड़ी आपत्तियां की गईं, जिन्होंने विधेयक को ‘मुस्लिम विरोधी’ और ‘असंवैधानिक’ करार दिया, जबकि सरकार ने जवाब दिया कि ‘ऐतिहासिक सुधार’ से अल्पसंख्यक समुदाय को लाभ होगा। मंत्री ने यह भी दावा किया कि सरकार द्वारा लाए गए विधेयक में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के साथ-साथ हितधारकों द्वारा दिए गए कई सुझावों को शामिल किया गया है।
सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक 2025 अल्पसंख्यकों को परेशान करने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि 1995 के एक्ट में जो मौलिक तत्व थे, उन्हें तो जगह मिली है, लेकिन ऐसी कई नई बातें भी शामिल की गई हैं, जिनकी कोई जरुरत नहीं थी। खड़गे ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि इस बिल में अभी भी कई कमियां हैं। इससे नुकसान उठाना पड़ेगा। विपक्षी दल ने विधेयक का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि यह ‘असंवैधानिक’ है और इसका उद्देश्य मुसलमानों को निशाना बनाना है। उन्होंने दावा किया कि इस विधेयक का उद्देश्य मुसलमानों की संपत्तियों पर कब्जा करके उन्हें कॉरपोरेट्स को सौंपना है।












