
पहलगाम में दिल दहला देनी वाले आतंकी घटना को लेकर पूरे देश में रोष की लहर है तथा हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए कहीं श्रद्धांजलि सभाएं हो रही हैं तो कहीं लोग कैंडल मार्च निकालकर उन्हें श्रद्धांजलि भेंट करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना कर रहे हैं।

इसी कड़ी के तहत होशियारपुर में भी विभिन्न राजनीतिक, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी कैंडल मार्च निकालकर एकजुटता का संदेश देते हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की। लेकिन इस दौरान कुछ लोगों ने शर्म की सारी हदें पार कर दी और उनके लिए यह कैंडल मार्च जहां हंसी मजाक करने एवं वीडियो बनाकर वायरल करने का साधन रहा वहीं इस दुख की घड़ी में उनके ठहाके यूं प्रतीत हो रहे थे मानो उन्हें यह दुख की घड़ी भी मजाक सी प्रतीत हो रही हो। उनके हाथ मेें पकड़ी कैंडल भी आंसू बहा रही थी और उनके हंसी के ठहाके सुनकर शायद और रोना आ रहा होगा।
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एक तरफ नाम पूछकर और पैंट उतरवाकर गोली मारने वाले आतंकियों को सख्त सजा देने की मांग के स्वर प्रखर थे तो दूसरी और कुछ नेताओॆं एवं तथाकथित प्रधानों के हंसते हुए चेहरे उनके द्वारा कैंडल मार्च के नाम पर की जा रही खानापूर्ति को दर्शा रहे थे। हालांकि कुछेक को शायद अपनी गलती का एहसास हो गया होगा और उनके द्वारा अपने वीडियो सोशल मीडिया से हटा भी दिए गए। लेकिन कुछ बेशर्म किस्म के मौकापरस्तों के लिए कैंडल मार्च सुर्खियां बटोरने का साधन बना। लेकिन वह यह बात भूल गए हैं कि अगर कोई उनका अपना इस हमले का शिकार हुआ होता तो क्या उनके चेहरे पर मुस्कान होती। क्या वह कैंडल मार्च के नाम पर की जाने वाली खानापूर्ति में ठहाके लगाते तथा उनके हंसते हुए चेहरे के साथ वीडियो सोशल मीडिया पर डाली जाती। अगर नहीं तो इस प्रकार किसी की मौत पर ठहाके लगाने का अधिकार किसी को नहीं है और वह भी ऐसी घटना पर जिसने पूरी इंसानियत को शर्मसार किया हो और देशवासी इसका प्रतिशोध लेने को सड़कों पर उतरे हों।
फिर वही सवाल कौन-कौन थे, क्या नाम था, अरे भाई जो लोग कैंडल मार्च में गए, जिन्होंने वीडियो बनाए वह अपने-अपने वीडियो ध्यान से देख लें, पता चल जाएगा कि किन लोगों को अधिक दुख था कि उनकी हंसी छूट रही थी। मुझे दें इजाजत। जय राम जी की।












