
होशियारपुर में बहुत सारे नेता हुए व हैं, लेकिन कुछेक नेता ऐसे हैं जिनकी अनदेखा करने की कला कहें या अदा, ने सभी को कायल करके रखा हुआ है और उनके चर्चे भी काफी हैं। आलम यह है कि बात करते हुए अपने आस-पास खड़े लोगों को कैसे अनदेखा करना है तथा उनकी बात का जवाब किस प्रकार जलेबी की तरह सीधा देना है, में माहिर इन नेताओं की कथनी और करनी के अंतर से भी लगभग सभी वाकिफ हो चुके हैं। अब आप बताएं कि आप किसके फैन हैं।

स्टैलर चुटकी
आप भी सोच रहे होंगे कि आज हम कैसा मुद्दा एवं विचार लेकर आए हैं, लेकिन यह सत्य है कि कुछेक नेताओं की इन दिनों खासी चर्चा हो रही है और यह चर्चा उनके द्वारा अनदेखा करने की कला की है। काफी पहले की बात है कि एक नेता जी ऐसे थे, जो जब नेता नहीं थे तो सभी के पैर पड़ना एवं गले मिलना जैसी अच्छी आदतों के आदि थे, जैसा कि नार्मल हर कोई नेता होता ही है। पहली जीत ने उनके दिलो-दिमाग पर ऐसा असर किया कि जिस हलके से उन्हें जीत मिली वहां के लोग उन्हें थोड़ा-थोड़ा चुभने से लगे। लेकिन किसी द्वारा समझाए जाने पर उन्होंने अपने हलके को अपना घर मानना शुरु कर दिया और जीत के बाद मंत्री तक बने। परन्तु चंद चमचों को छोड़ उन्होंने किसी और की सुनी ही नहीं और अपने किसी खास से ही हार गए।
एक और नेता जी थे, जिन्होंने अपने अहंकार में ही राजनीतिक सफर निकाल दिया और आज कम ही लोग उनका नाम लेकर उनके द्वारा किए गए किसी खास काम को याद करते होंगे। इतना ही नहीं एक नेत्री तो ऐसी रहीं हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल में चंद चहेतों का संवारने में ही समय गुजार दिया और अन्य लोगों के साथ उनका व्यवहार उनके राजनीतिक कैरियर में रोड़ा बना। वैसे कभी-कभार किसी मुद्दे को लेकर मीडिया से रूबरु होती रहती हैं। एक और नेत्री भी काफी चर्चा में रही, जोे अपनी मधुर वाणी को लेकर जानी जाती थीं और उनके मुख से निकले स्वरों को सुनकर सामने वाला तो शर्मसार होता ही था साथ ही उसके साथ आए और लोग भी सोचने पर मजबूर हो जाते कि आखिर वह आ कहां आए। काम करवाने में माहिर इस नेत्री के मधुर बोल ही उसके पतन का कारण बने और आज सत्ता विहीन होकर छोटे-मोटे मामलों पर प्रतिक्रिया देकर अपने मन को तस्सली देने का काम जरुर कर रही हैं।
होशियारपुर को एक नेता जी ऐसे मिले जो अपनी सूझबूझ से चंद ही वर्षों में राजनीतिक गलियारों में छा गए। लेकिन उनके आसपास की धमाल चौकड़ी ने उन्हें सातवें आसमान पर चढ़ा दिया और वह उनसे मिलने आने वालों में से कम ही होंगे जिन्हें एक-आधा मिनट से भी अधिक का समय देते होंगे। अनदेखा करने और आंखें चुराने में माहिर उस नेता का भी हाल उक्त नेत्री जैसा ही है। आज दो-चार लोगों के सिवाये उनके पास भी कोई पांचवां नहीं है, लेकिन राजनीतिक ऐसी करते हैं कि बड़े-बड़े मात खा जाएं, मगर पिछले काफी समय से वह खुद मात खाए घूम रहे हैं। लेकिन चढ़त पूरी रखते हैं।
इसी दौरान एक नेता जी और आए और उन्होंने गांधी जी के सहारे यानि पैसे के दम पर राजनीति के मायने ही बदलकर रख दिए, जिससे काम वह खास एवं करीबी, काम पूरा तो हम कौन, आप कौन। इतना ही नहीं काम आने वालों को यूज़ करना एवं आम जनता के बीच जाकर अपनों को नीचा दिखाने की उनकी कला ने उनके कई अपनों को उनसे दूर कर दिया तथा आज महलों में इक्का-दुक्का लोगों के साथ बैठे अपनी गलतियों पर पछतावा करते हुए चर्चा में आ ही जाते हैं। और तो और जनता के सिर ताज हासिल करने वाले यह नेता जी भी बड़े कलाकार हैं और पास बैठे को ऐसे इग्नोर कर जाते हैं कि बेचारा मारे शर्म से किसी को कुछ बता भी नहीं सकता।
इसी बीच होशियारपुर को एक नेता ऐसे मिले, जिसकी इस कला ने सभी को दिवाना कर रखा है यानि कि मिलते समय आंखें कहीं तो हाथ कहीं। देखना कहीं और, बात कहीं और। अपने स्वार्थ के लिए लोगों का इस्तेमाल करने में माहिर इस नेता की एक बहुत बड़ी खासियत है कि इतनी मिठास से और अपनेपन से पास खड़े को अनदेखा करके आगे बढ़ जाते हैं कि पास खड़ा फिर से वही कि शर्म का मारा कुछ कह भी नहीं सकता। अच्छा यह कला इस नेता में हो भी क्यों न आखिर उक्त नेता के सानिध्य में रहते हुए काफी समय साथ जो गुजारा है और अच्छा समय आने पर जहां ऐसी आदतों को छोड़ना चाहिए था, वहीं इस नेता ने इसे अपनी रोजमर्रा की आदतों में शामिल कर लिया।
अभी इन नेताओं की इस कला के चर्चे चर्म पर पहुंचे ही हैं कि एक और पैसे वाले नेता ही एंट्री कुछ इस अंजाद से हो गई कि सारे चित्त हो गए। एक पाले से दूसरे और दूसरे से तीसरे में जाने की तैयारी में बैठे इस नेता ने तो सारी हदें ही पार कर दी। जिन लोगों ने जिताया उन्हें भूलकर एक विधानसभा क्षेत्र तक ही ध्यान केन्द्रित करने वाले इस नेता की इन दिनों काफी तूती बोल रही है और अपने सग्गे संबंधियों के साथ-साध चंद चहेतों को मालामाल होने का आशीर्वाद देकर नेता जी सत्ता सुख में जन सेवक होने का ऐसा दिखावा कर रहे हैं कि मानो उनसे बड़ा होशियारपुर में है ही नहीं, जबकि सत्य क्या है यह भी किसी से छिपा नहीं। लेकिन स्वार्थ से बंधे लोग खुलकर बोलने को तैयार नहीं। इस नेता की भी खूबी है कि मीठे स्वर में पास आए को ऐसे ढांढस बंधाते हैं कि अगला मूरीद हो जाए। परन्तु बातों ही बातों में इशारा भी कर जाते हैं कि काम होगा कैसे तथा होगा भी या नहीं यानि कि करवाया भी जाएगा या नहीं। क्योंकि अभी तक उन्हें किसी अपने ने कहा ही नहीं होता कि इसका काम करना है या नहीं। समझे क्या। जरुरत पड़ने पर इनका भी पता तब चलता है जब पैसे, पहुंच व ताकत के गरुर में डूबे इस नेता द्वारा कोई बहाना बनाकर टाल दिया जाता है तथा यहां भी चंद करीबियों की ही जयजयकार है।
शहर की बात कर रहा हूं तो नए-नए सुर्खियों में आए नेता जी की बात कैसे भूल सकते हैं। इस नेता की अति मधुर वाणी एवं सुने को अनसुना करने की कला के बहुत सारे लोग दिवाने हैं। क्योंकि, इनके पास जनता का काम हो न हो। पर पार्टी के चंद लोगों का काम ऐसे करवाते हैं, जैसे मशीन में डाले गन्ने से रस निकलता है। आधी बात समझ में आए और आधी ऊपर से निकल जाए, ऐसे महान नेता जी इन दिनों सुर्खियों में हैं। क्योंकि आम लोगों से प्रेम प्यार से मिलकर ढांढस बंधाने वाले इस नेता जी का हाल भी कुछ-कुछ ऊपर वालों जैसा ही है। यानि पंचां दा केहा सिर मत्थे, पर नाला उत्थे दा उत्थे। काम होगा तो यह भी आपको खुद बुला लेगा, लेकिन काम न होने पर पास से गुजर जाएगा और आपको खबर तक नहीं लगेगी। जिस कारण लोगों में इस नेता की लोकप्रियता भी काफी प्रभावित हो रही है।
एक नेता जी ऐसे हैं जो सामने वाले की हैसियत देखकर उनसे मुखातिब होत हैं और सामने वाला अगर सेठ हो तो सोफे पर नहीं तो बाहर लगी कुर्सियों पर। अनदेखा करके काम करवाने या न करवाने की उनकी काल के कई लोग दिवाने हुए कुछ इस कदर बेहाल हुए कि उन्होंने उनके पास जाना ही छोड़ दिया। लेकिन सेठों और रसूखदार लोगों से निकटता ऐसी कि उनकी फाइलें तक खुद उठाकर काम करवाकर उन्हें बताने में शर्म तक नहीं करते। दिखावे में सरल पर उच्चस्तरीय जीवन यापन करने वाले इस नेता ने अपने जैसा ही एक चेला राजनीतिक गलियारों में उतारा तथा जब वह भी कुछ बन गया तो उसने सबसे पहले उसे छोड़ा जिसने उन्हें इस मुकाम तक काबिल किया और फिर उसने उन्हें छोड़ा जिन्होंने दिन रात एक करके जीत के यज्ञ में आहुति डाली। इसके बाद उसके इर्द गिर्द कुछ ऐसे लोगों का जमावड़ा लगा, उनके बारे में अगर कहा जाए कि जनाधार न के बराबर तो कुछ गलत नहीं होगा तथा उन्होंने उस नेता तो जनता से दूर रहने के ऐसे गुर सिखाए कि आज वह भी खाली बैठा कुछ मिलने के इंतजार में है।
ये तो रही कुछ नेताओं की बात, जिनकी गुड्डी चढ़ी भी और ऊतर भी कई तथा कई आज भी हवाबाजी में व्यस्त जनता को अपने स्वार्थ एवं सुख के लिए प्रयोग करके खूब धन संपदा बटौर रहे हैं तथा उनकी ताकत के आगे सभी नतमस्तक हुए उनके आगे पीछे घूमने को विवश से नज़र आते हैं।
क्या-क्या, कौन कौन से नेता हैं, नाम बता दूं। भाई साहब आप चाहते हैं कि मैं शेर के पिंजरे मं जाऊं और उसकी मूछ का बाल तोड़कर लाऊं। आप खुद इतने समझदार हैं कि आप जानते हैं कि कौन कितना बड़ा कलाकार है, बस मेरे मुंह से सुनना चाहते हैं। तो बात ऐसी है, मुझे पानी में रहकर मगरमच्छ से वैर नहीं करना। जो चर्चा थी वह आपसे सांझा की। वैसे एक बात है, किसी चमचे को बुरा लगा तो क्षमा याजना भी करता हूं। आप समझें या न समझें, पर न समझे ऐसा हो नहीं सकता, पर इतना जरुर है कि आप मुझे बताएं जरुर कि आपको किसकी अदा व कला पसंद है। मुझे दें इजाजत। जय राम जी की।












