
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। बड़े अफसोस की बात है कि इन दिनों स्कूलों में ऐसा वातावरण बनाया गया है कि अगर कोई विद्यार्थी स्कूल के काम में हाथ बंटा दे, मेहमानों या अध्यापकों को पानी या कुछ और सामान लाकर दे दे तो शोर मचा दिया जाता है कि यह विद्यार्थियों के साथ अन्याय हो गया। पिछले दिनों अमृतसर के ही एक स्कूल में शिक्षा मंत्री के आने पर बच्चों ने जलपान सेवा की। यह खुशी की बात है कि बच्चे अध्यापकों की देखरेख में अपने अतिथियों के लिए यह काम करते हैं, लेकिन कुछ तथाकथित समाजसेवक और कुछ सुधारवादी यह मानते हैं कि बच्चों के साथ जुल्म हो गया, उन्हें वेटर बना दिया और इसके लिए स्कूल के कुछ अध्यापकों को सस्पेंड कर दिया गया। इस तरह का शोर मचाने वालों को याद रखना होगा कि अगर वे कभी स्कूल में पढ़े हैं तो जिस विद्यार्थी को अध्यापक यह कार्य करने के लिए नहीं कहता था या स्कूल के कार्यों में उन्हें हाथ बंटाने का अवसर नहीं देता था तो वे विद्यार्थी यह समझते थे कि वे इस काम के योग्य नहीं।

मुझे गौरव है कि विद्यार्थी रहते हुए मैंने अध्यापकों के साथ मिलकर हर काम किया और अध्यापक रहते हुए विद्यार्थियों ने मुझे पूरा सहयोग दिया। याद रखना होगा कि जब हम डीएवी कालेज अमृतसर में अध्यापक बनकर गए तो कालेज के भवन निर्माण का कार्य हम सब विद्यार्थी और अध्यापक बड़े गर्व के साथ करते थे और आज तक यह याद रखते हैं कि यह कक्ष बनाने का काम हमने किया। विद्यार्थियों को शारीरिक दंड नहीं देना चाहते यह तो ठीक है, पर विद्यार्थियों को अनुशासन में भी रखना है और उन्हें हर काम में हाथ बंटाने का अवसर भी देना है। यह तथाकथित विद्यार्थियों का हितचिंतन नहीं कर रहे।












