
स्कूल एक ऐसा स्थान है जहां पर उन्हें तराशा जाता है, जो हमारे समाज एवं देश का भविष्य होते हैं। इस पावन स्थान को चलाने वाले यानि की प्रबंधक, मुख्य अध्यापक एवं अध्यापक भी पूजनीय एवं वंदनीय होते हैं। मगर, अक कहावत है न कि अगर बाड़ ही खेत को खाने लगे तो खेत का क्या होगा इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। कुछ ऐसा ही शहर में स्थित एक स्कूल में हुआ है तथा उसके प्रबंधकों का हाल तो देखिए, खेत को खाने वाले यानि कि स्कूल की बेहतरी के लिए एकत्रित फंड में लाखों की हेराफेरी हो गई और प्रबंधकों ने किसी एक पर (वह भी कर्मियों में सबसे कमजोर कड़ी) सारी जिम्मेदारी डाल अपने फर्ज की इतिश्री कर ली और यहां तक कि कुछ राशि वापस आने की बात भी कर डाली ताकि सभी के मुंह बंद रह सकें व स्कूल की बदनामी न हो।

स्टैलर चुटकी
स्कूल में हुए घपले एवं उस पर पर्दा डालने के लिए प्रबंधकों ने इतनी कुशलता से काम किया कि हवा तक भी बाहर नहीं निकलने दी। लेकिन ऐसी बातें छुपी कहां रहती हैं, पेट में दर्द वाले बहुत होते हैं कि जब तक किसी को बता न दें उनके पेट में गैस सी बनी रहती है। इसीलिए तो कहा गया है कि नेता हो या अभिनेता, उसे ही साथ रखे जिसका हाज़मा दुरुस्त एवं पक्का हो, जो भी खाओ, खिलाओ पचा जाए व डकार भी ले।
खैर हमें क्या। एक संस्था से जुड़े जिन पैदल चलने वाले बड़े-बड़े अधिकारियों को ये बड़ी-बड़ी गाड़ियों की आदत लग जाए फिर उनकी आंखों पर चश्मा लगना स्वभाविक है। चश्मा कौन सा है यह आप समझ सकते हैं। होशियारपुर का एक स्कूल इन दिनों स्कूल में हुए लाखों रुपयों के घपले को लेकर खूब चर्चा में है और चर्चा भी ऐसी कि कोई यकीन न करे कि इस स्थान पर भी ऐसा हो सकता है। बात जब खुली तो संस्था के बड़े अधिकारियों ने जैसे-तैसे करके बात को संभाला और जिनकी गाड़ियों में घूमें फिरे व घूमते भी हैं का मान सम्मान बरकरार रखने के लिए युगत भिड़ाई और मामला जैसे-तैसे सैटल कर दिया। चर्चा है कि एक कमजोर कड़ी को खोजा गया और उसके नाम पर सारा बंब फोड़ दिया गया तथा सभी को शांत करने के लिए कह दिया गया कि कुछ पैसे वापिस भी आ गए हैं। अगर, मामला उछलता है तो स्कूल की काफी बदनामी हो जाएगी। इतना ही काफी है, जिन्होंने किया वह भी समझ गए होंगे और जिन्होंने पर्दा डाला वह भी और आप भी तो समझ गए हैं कि मामला आखिर है कहां का। अब और सवाल नहीं… अधिक जानकारी के लिए संघे शक्ति युगे-युगे का अनुसरन करना होगा। मुझे दें इजाजत, जय राम जी की।












