
होशियारपुर(द स्टैलर न्यूज़), रिपोर्ट: गुरजीत सोनू। पंजाब विश्वविद्यालय साधु आश्रम विश्वेश्वरानन्द विश्वबन्धु संस्कृत संस्थान में कार्यशाला एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र के मुख्यातिथि प्रो. वेद प्रकाश जी (दिल्ली विश्वविद्यालय) तथा सत्राध्यक्ष प्रो. शिवधार चौबे थे। प्रो. कृष्णा सैनी ने मंच का संचालन किया। कार्यक्रम का आरम्भ वैदिक मंगलाचरण, सरस्वती वंदना एवं स्वागत गान से किया गया।

चार दिवसीय कार्यशाला में शिक्षित विद्यार्थियों ने सस्वर मन्त्रों का पाठ किया। प्रो. रघुवीर सिंह, डा. सुघांशु कुमार, प्रो. कृष्णा सैनी, प्रो. प्रभात सिंह ने मुख्यातिथि का माल्यार्पण से स्वागत किया। डा. षडङ्गी ने 15 से 18 मार्च 2018 तक महर्षि विश्वामित्र वेद-वेदांग-कार्यशाला और राष्ट्रीय संगोष्ठी का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मुख्यातिथि ने डा. वेद प्रकाश ने कहा कि वेद के वास्तविक अर्थ को जानने के लिए हमें आरण्यक ग्रंथों के ज्ञान की बहुत आवश्यकता है। आरण्यक ग्रन्थ ब्राह्मणों ग्रंथों और उपनिषदों के बीच की कडी है। आरण्यक ग्रंथों में कर्मकाण्ड तथा ज्ञानकांड का समन्वय है।
समापन स्तर के अध्यक्ष डा. शिवाधार चौबे ने आरण्यक ग्रंथों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला डा. चौबे ने कहा की आरण्यक ग्रंथों को पडने से हमें भारतीय संस्कृति संस्कार यज्ञ, कर्मकाण्ड आदि का ज्ञान होता है। डा. सुघांशु कुमार ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर प्रो. रेणु बाला, प्रो. दलबीर सिंह, डा. विशाल शर्मा, डा. देवराज, आदि गण्यमान्य उपस्थित थे।












