Thursday, October 29, 2026
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आत्म उद्धार, इंद्रियों को वश में और योग ध्यान करो व कामनाओं से मुक्त रहोः आचार्य चंद्र मोहन

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में साप्ताहिक सत्संग के दौरान भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि गीता कर्म योग और धर्म का ज्ञान देती है इसमें भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कहा कि मैं जो तुम्हें उपदेश दे रहा हूं। मैं यह उपदेश पहले भी दे चुका हूं।  मैंने यह उपदेश महाराज विसबान( सूर्य) को सतयुग में दिया था। लेकिन दुख की बात है कि हम इस ज्ञान को नहीं पढ़ते। 

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हमें केवल दूसरे लोगों के बारे में पढ़ाया जाता है। जो अपने इतिहास को भूल जाता है उसके अंदर शक्ति नहीं रहती। हम आज इसीलिए कमजोर है क्योंकि हम अपने इतिहास को भूलते जा रहे हैं। कई लोग हिंदू धर्म को कमजोर करने में लगे हैं लेकिन उन्हें जवाब देने वाले लोग आगे नहीं आ रहे। धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। गीता के छठे अध्याय में आत्म संयम योग के बारे में बताया गया है। इसे कर्म योग कहते हैं। लेकिन कई लोग निष्कर्म योग की तरफ अग्रसर होते जा रहे हैं। उन्होंने धर्म को बिगाड़ दिया है। उन्होंने कहा कि गीता पढ़ना तो आसान है लेकिन उस पर चलना मुश्किल है।

कर्म योग कहता है कि कर्म करो और संयम बरतो। योग कहता है आत्मा का उद्धार करो। संयम करने की 11 बातें बताई गई है। कर्म के फल का त्याग करो, संकल्प का त्याग करो, आत्म उद्धार करो, इंद्रियों को वश में करो, योग ध्यान करो, मिताहार करो, आत्म चिंतन करो, कामनाओं से मुक्त रहो, हमारे कर्म अच्छे होने चाहिए, इनमें प्रमुख है। लेकिन हमने धर्म के नाम पर गलत धारणाओं को अपनाया है जिसका खामियाजा हम भुगत रहे हैं। हमारे समाज ने धर्म के नाम पर सती प्रथा को बढ़ावा दिया जिसके चलते न जाने कितनी कन्याओं को जलाया गया। राजा राममोहन राय ने अंग्रेजों से इसके विरुद्ध कानून पास करवाया। तब जाकर यह प्रथा बंद हुई।

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