Saturday, October 31, 2026
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प्राचीन शिव मंदिर गगन जी का टीला बना श्रद्धा तथा आस्था का बना केन्द्र 

दसुहा (द स्टैलर न्यूज़), रिपोर्ट-मनु रामपाल। इस मन्दिर का इतिहास प्राचीन काल से तथा पांडबो केसाथ जुडां हुआ है इतिहास यह मन्दिर होशियारपुर की तहसील दसुहा के कणडीं ऐरीया की शिबालीक पहाड़ी पर स्थित है। गगन जी का टीला, होशियारपुर जिले में स्थित एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है। यह मंदिर पंजाब का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है और यहां भगवान शिव की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है, और पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां भगवान शिव की पूजा की थी। गगन जी का टीला मंदिर के बारे में कुछ मुख्य बाते यह मंदिर पंजाब के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में से एक है, और यहां पहुंचने के लिए 762 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

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ऐतिहासिक महत्व 

मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है, और माना जाता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां भगवान शिव की पूजा की थी।

धार्मिक महत्व

यह मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है, और यहां हर साल सावन और शिवरात्रि के दौरान विशेष पूजाएं होती हैं। 

प्राकृतिक सौंदर्य

मंदिर पहाड़ी पर स्थित है, और यहां से आसपास के खूबसूरत दृश्यों का आनंद लिया जा सकता है। 

दसूहा से दूरी

गगन जी का टीला मंदिर दसूहा से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि अपने प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के कारण भी एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।

गगन जी का टीला का इतिहास

पांडबोंसे प्राचीन शिव मंदिर गगन जी का टीला जिसका इतिहास पांडबों से जुड़ा हुआ है। मन्दिर के इतिहास के अनुसार अज्ञातवास काटने से पहले भगवान श्री कृष्ण ने पांडबों से कहां कि अज्ञातवास में जाने से पहले तुम किसी सुनसान जगह की तलाश कर बहां पर भगवान शिव शंकर जी की पूजा अर्चना करना तब पांडबों ने भगबान कुष्ण की बताई बात पर अमल करते हुए सुनसान जगह की तलाश करते हुए इन पहाड़ीयों पर पहुचे यहां पांडबों और द्रौपद्री ने भगवान शिव की पूजा की पुजा से खुश होकर भगवान शिव शंकर ने उन्हें दर्शन दिए और एक शिवलिंग देकर वरदान दिया कि भविष्य में जो जहा पर सच्चे मन और श्रद्धा से पूजा अर्चना करेगा उसकी मनोकामना पूरी होगी।

उसके बाद पांडबों और दौपद्री ने अज्ञातवास शुरू करने के लिए भेस बदल कर दसुहा शहर जिसे उस समय बिराट नगर के नाम से जाना जाता था और राजा बिराट मे नोकर बन कर नोकरी की अपने अज्ञातवास के दोरान प्रत्येक पूर्णमासी के दिन पांडवों में से कोई न कोई भेस बदल कर इस पहाड़ी पर आकर भगवान शिव की पूजा करते थे इस मन्दिर का इतिहास कलियुग से समय से जुड़ा हुआ है कहते हैं कि कलियुग के समय में हिमाचल का एक राजा जब जहा से पहाड़ी के निचे से गुजर रहा था तो उसे पहाड़ी पर कुछ दिखाई दिया और राजा ने पहाड़ी के ऊपर जाकर देखा तो बहा पर उसे शिवलिंग दिखाई दिया राजा के धर कोई औलाद नहीं थी उसने वहां पूजा करके भगवान से फरियाद की कि अगर उसके घर औलाद हो जाए तो यह पूर्णमासी के दिन यहां आकर हवन यज्ञ करवाएगा कुछ समय पशचात राजा के घर लड़की ने जन्म लिया तब राजा ने इस स्थान पर पहुंच कर हवन यज्ञ करवाने के पशचात लड़की का नाम गगन रखा तव से यह स्थान गगन जी का टीला नाम से मशहूर हो गया।

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