
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। श्री राम चरित मानस प्रचार मंडल के स्वर्णिंम जयंती के मौके पर श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर प्रकाशानंद जी सरस्वती महाराज के आशीर्वाद एवं सानिध्य में करवाए जा रहे श्री राम नवमीं महोत्सव के दूसरे दिन कथा करते हुए देवी भक्तिप्रभा ने आत्मा और परमात्मा के संबंध का वर्णन किया और राम नाम की महिमा गाई। उन्होंने कहा कि जैसे सोना एक ही है, लेकिन नाक में पहनों तो नथनी, कान में पहनों तो झुमके, गले में पहने तो हार बन जाता है, लेकिन असल में वह सोना ही है, एक ही है। इसी प्रकार राम जी के रुप अनेक हैं, लेकिन वह एक ही हैं। जहां भी देखो भगवान हैं, देखने-देखने का ढंग है। किसी ने कहा, भगवान के मिलेंगे, उनके मिलने की कौन सी सीमा है। यहां तक है या वहां तक है, जहां जाकर भगवान को खोज लें। तो महात्मा जी ने कहा कि असर उसका वहां तक है, नजर जिसकी जहां तक है। जहां तक आप देख पाते हो सभी में भगवान का वास है।

श्री राम चरित मानस प्रचार मंडल की स्वर्णिम जयंती के अवसर पर श्री राम नवमीं महोत्सव का दूसरा दिन
जन जन में कण कण में भगवान का वास है और हमें यह अचूक अवसर मिला है कि हम भगवान की स्तुति करके अपने जन्मो-जन्मांतरण के बंधनों से मुक्त हो जाएं। उन्होंने भजन राम जपो राम जपो बाबरे, अवसर अचूक आयो…के माध्यम से राम नाम की महिमा का वर्णन किया। इसके बाद उन्होंने हरि का भजन करो हरि है हमारा भजन से सभी को नाम सुमिरन की प्रेरणा दी। इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज ने शुभाशीष देते हुए सभी को मंडल द्वारा किए जाते सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देवी भक्तिप्रभा परम पूज्य स्व. महाराज राजेश्वरानंद जी की बेटी हैं और इनकी मधुर वाणी से श्री राम कथा सुनकर हम सभी धन्य हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्वामी राजेश्वरानंद जी 1998 में श्री भवन में कथा कर चुके हैं तथा आज भी उनकी स्मृतियां हम सभी के बीच बनी हुई हैं।
इस मौके पर प्रधान हरीश सैनी, सुरेन्द्र ओहरी, अश्वनी चोपड़ा, महिंदरपाल गुप्ता, हरीश आनंद, रमन वर्मा, सुनील प्रिय, सुरेन्द्र लक्की, तिलक राज वर्मा, जेके शर्मा, एसपी गौतम, अश्वनी शर्मा, पवन विग, कंवलजीत सिंह पिंका, सुरजीत सोनी, मास्टर निहाल चंद, विनोद शर्मा, अशोक शर्मा, मोहित शर्मा, मुकेश शर्मा, राहुल आनंद, इंजी. सौरव वर्मा सहित अन्य गणमान्य एवं श्रद्धालु मौजूद थे। आरती उपरांत प्रसाद रुपी भंडारा लगाया गया।












