
यह बात तो सभी जानते हैं कि जब भी कोई पार्टी सत्ता आसीन होती है तो भले ही चुनाव के समय उसके नेताओं द्वारा ईमानदारी के बड़े-बड़े भाषण दिए जाते हों या दावे किए जाते हों, लेकिन जैसे ही माया का पर्दा आंखों पर पड़ता है ईमानदारी धरी की धरी रह जाती है। कुछ ऐसा ही मौजूद समय में भी देखने को मिल रहा है। सत्ताधारियों में कुछ ऐसी काली भेड़ें भी हैं जो अपनी ताकत के दम पर करोड़ों नहीं बल्कि अरबों रुपये हवाले के माध्यम से विदेशों में बसे उनके इनवैस्टरों के पास पहुंच रही हैं। जिसके चलते देश और देशवासियों को कितना नुकसान पहुंच रहा है, इसे भलीभांति समझा जा सकता है।

विश्वसनीय सूत्रों की माने तो कट्टर ईमानदार होने का दावा करने वाली सरकार के समय में ग्रीन जोन से निकालकर आर जोन में कितनी जमीनें की गई, की लिस्ट अगर जनतक कहीं हो जाए तो सारा मामला खुद-ब-खुद ही सारी कहानी बयान कर देगा, कि किस प्रकार एक मैनेज बिठाकर अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए नेता जी या नेताओं ने गोलमाल कर डाला। छोटे शहरों में यह मामले हालांकि कम ही देखने को मिलेंगे, लेकिन बड़े-बड़े शहरों में ऐसे मामलों की तादात काफी होने से उससे हुई काली कमाई कहां और किस प्रकार एडजस्ट की गई का सच भी जनता के समक्ष होगा। इतना ही नहीं कई बड़े चेहरे भी बेनकाब होकर जनता के बीच अपना मुंह छिपाते हुए नज़र आएंगे। हालांकि, हमारे यहां एक कहावत मशहूर है कि बेशरमा दी डुल्ली दाल, कहिंदे असी डोल-डोल खांदे आं इन जैसे नेताओं और अधिकारियों पर सटीक बैठती है जो बेशरमों की तरह मुंह छिपाना तो दूर मुंह पर जरा सी भी शिकंज़ लाना भी जरुरी नहीं समझते। सूत्रों की माने तो सरकार के मंत्री ने कुछ समय पहले ही हवाले के माध्यम से करीब पौने 3 सौ करोड़ रुपये की राशि हवाला के माध्यम से सतलुज नदीं के किनारे बसे एक शहर से विदेश भिजवाई। जिसकी भनक लगते ही पार्टी उच्चाधिकारियों और संचालकों द्वारा उनका विभाग बदल दिया गया। क्योंकि, पार्टी के नाम पर मान इकट्ठा करने वाले यह महानुभव पार्टी नेताओं को उनका बनता हिस्सा पहुंचाने में कहीं न कहीं चालबाजी जो कर रहे थे। ताजी-ताजी मिली मिनिस्ट्री के बाद चंद माह में ही विभाग का बदला जाना कहीं न कहीं पैसे के हेर फेर की तरफ ही इशारा करता है कि हिस्सा बटा नहीं तो ही कटा।
सूत्रों के हवाले से यह भी पता चला है कि पार्टी लैवल पर मंत्रियों और विधायकों की संपत्तियों की जांच भी करवाई जा सकती है या इसके लिए पहले से ही सीआईडी उनके पीछे लगाई जा चुकी है। वैसे भी कुछ समय से एक बड़े नेता के पार्टी से बेमुख होने और सारी पार्टी द्वारा उस पर बागी होने के आरोप लगाए जाने भी पैसों के लिए बिगड़ी कहानी को बयान करता है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में ऊंट किस करवट बैठता है और ईमानदारी की पीपनी बजाने वाले इन नेताओं को जनता किस पद पर आसीन करती है।
कौन सा नेता है, कहां का है, दिखता कैसा है??? अरे भाई हमने पहले कभी जवाब दिया है जो अब देंगे, क्योंकि हमें पता है कि आप बहुत समझदार हैं और समझदार के लिए इशारा ही काफी होता है। चुनाव के दिनों में सारी सच्चाई बाहर आ जाएगी..आप देखते रहिए। वैसे मुंह में बोलने वाले को डाक्टर-डाक्टर कहते हैं, जिनका कहा समझ भी उन्हीं के करीबियों को आता है, आखिर कोड वर्ड भी कोई चीज होते हैं। हमें दें इजाजत। जय राम जी की।











