
मध्यप्रदेश (द स्टैलर न्यूज़)। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में जय किसान संगठन के बैनर तले केन नदी के किनारे चल रहा आदिवासी-किसान आंदोलन 12 दिनों बाद अहम मोड़ पर पहुंच गया। केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझंगाय, रुँझ और नैगुवा परियोजनाओं में प्रशासनिक मनमानी और भ्रष्टाचार के विरोध में चल रहे इस ‘पंचतत्व सत्याग्रह’ ने प्रशासन को झुकने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद आंदोलन को 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है। आंदोलन ऐसे समय में जारी रहा जब प्रशासन ने क्षेत्र में धारा 144 (वर्तमान में धारा 163) लागू कर रखी थी। इसके बावजूद हजारों आदिवासी, किसान और महिलाएं शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ता के साथ डटे रहे। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘हमारे जंगल, जमीन और घर हमसे छीने जा रहे हैं, इसलिए हमें विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा है।

उन्होंनें कहा कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, हम यहां से नहीं हटेंगे। अगर वे हमारी अनदेखी करते रहे, तो हो सकता है कि हम उग्रवाद की राह पर चल पड़ें। दुर्गा, काली की तरह, हम भी रौद्र रूप धारण कर सकते हैं।’ लगातार दबाव के बाद प्रशासन बात करने के लिए आगे आया और कुछ बातों पर सहमति जताई। 7 दिन में पारदर्शी सर्वे (डिप्टी कलेक्टर/तहसीलदार स्तर से), गांव के बदले गांव की नीति, विशेष पैकेज और मुआवजा बढ़ाने पर सहमति, कटऑफ डेट 1 अप्रैल 2026 तय, जिला स्तर की मांगों पर तत्काल आदेश, एसडीएम सहित अधिकारियों की सर्वे की जिम्मेदारी, प्रदेश और केंद्र स्तर की मांगों के लिए प्रशासन ने बातचीत का चैनल स्थापित करने का भरोसा दिया।
सामूहिक चर्चा के बाद आंदोलनकारियों ने प्रशासन को अंतिम मौका देने का फैसला किया और 10 दिनों के लिए आंदोलन स्थगित कर दिया। आंदोलन के अंत में अमित भटनागर और हजारों लोगों ने केन नदी में उतरकर संकल्प लिया। जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अधिकारों से समझौता नहीं होगा। 10 दिन तक प्रशासन का सहयोग करेंगे। वायदाखिलाफी होने पर और बड़ा आंदोलन होगा।












