
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज), रिपोर्ट-नीरज धीमान। पंजाब सरकार ने स्कूली बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है । राज्य में अब सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त प्राथमिक स्कूलों की प्री-प्राइमरी कक्षाओं (केवल पहली कक्षा से ठीक पहले वाली श्रेणी, जैसे UKG या बालवाटिका) में पढ़ने वाले नन्हें बच्चों को भी दोपहर का गर्म पका हुआ भोजन (मिड-डे मील) दिया जाएगा । पंजाब स्टेट मिड-डे मील सोसायटी की ओर से इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रभारियों को सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं ।

यह नई व्यवस्था भारत सरकार की ‘पीएम पोषण स्कीम’ (PM-POSHAN) की संशोधित गाइडलाइंस के तहत लागू की जा रही है । इसके मुख्य बिंदु और नियम निम्नलिखित हैं:
· दोहरा लाभ वर्जित: भोजन शुरू करने से पहले स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित बच्चे को किसी अन्य योजना (जैसे आंगनवाड़ी विभाग) के तहत दोपहर का भोजन या अनाज का लाभ न मिल रहा हो ।
· राशन की मात्रा और बजट: UKG के इन नन्हें बच्चों के लिए प्रतिदिन प्रति बच्चा 100 ग्राम अनाज (गेहूं या चावल) निर्धारित किया गया है । इसके लिए कुकिंग कॉस्ट की दरें प्राथमिक स्कूल के बच्चों के समान ही यानी ₹5.45 प्रति छात्र प्रतिदिन रखी गई हैं ।
· अतिरिक्त रसोइयों की भर्ती: प्री-प्राइमरी बच्चों के शामिल होने से यदि स्कूल में कुल छात्रों की संख्या बढ़ती है, तो नियमानुसार नए कुक-कम-हेल्पर (रसोइया) रखे जा सकते हैं । उदाहरण के लिए, यदि संख्या 180 से बढ़कर 205 हो जाती है, तो एक अतिरिक्त रसोइया रखा जा सकेगा 。
· अलग रिकॉर्ड और पोर्टल एंट्री: स्कूल स्तर पर इन बच्चों के अनाज और कुकिंग कॉस्ट के लिए अलग से स्टॉक और खर्च रजिस्टर बनाया जाएगा । ई-पंजाब (E-Punjab) पोर्टल पर आवश्यक बदलाव करके रोजाना इस डेटा को फीड करना अनिवार्य होगा 。
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस कदम से न केवल बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि स्कूलों में शुरुआती दाखिलों (एनरोलमेंट) को बढ़ाने में भी बड़ी मदद मिलेगी ।












