
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में साप्ताहिक सत्संग के दौरान भक्तों का मार्गदर्शन करते मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि सांसारिक जीवन दुखों से घिरा रहता है इसको सुखमय बनाने के लिए भगवान ने हमें बहुत से रास्ते बताए हैं। शास्त्र कहते हैं कि हम आने वाले दुखों को दूर भी कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि हम योग अनुकूल जीवन जिए। जो लोग अपना जीवन योग के अनुसार चलाते हैं उन को योगी कहते हैं क्योंकि वह योग से जुड़े होते हैं। योग से जुड़ कर जीवन सुखी बन जाता है। गीता में इसके लिए 6 बातें बताई गई है। हमारा आहार ठीक हो। बहुत से दुख तो हमारे आहार के कारण आते हैं। गलत आहार से हृदय, किडनिया आदि बिगड़ सकते हैं।

हम सही समय पर, सही मात्रा में, अपने शरीर की प्रवृत्ति के अनुसार खाएं। दूसरी बात यह है कि हमारा व्यवहार ठीक हो। अपने व्यवहार के कारण हम दूसरों से झगड़ा मोल ले लेते हैं और शांत नहीं रह पाते। हमारा व्यवहार सुखमय होना चाहिए। तीसरी बात यह है कि हमें अपनी इच्छाओं का ध्यान रखना होगा कहीं वह आसमान को न छू जाए। हम उन चीजों के बारे में भी सोचते हैं जिन्हें हम किसी भी हालत में प्राप्त नहीं कर सकते। चौथी चीज यह है कि हमारे कर्म भी ठीक हो। हमारे कर्म शास्त्र अनुसार तथा नियमा अनुसार हो। इसके अलावा हमारा सोना और जागना भी समयानुसार हो। भगवान ने नींद एक ऐसी चीज बनाई है कि अगर यह ना होती तो न जाने हमारे जीवन का क्या होता। हमारी नाड़ियो शरीर और मन को आराम चाहिए। नींद इसमें सहायक होती है। अगर हम दुखी हैं तो देखें कि उपरोक्त 6 चीजों में से हमारी कौन सी चीज ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर हम योग नहीं करेंगे तो बीमारियां हमें घेर लेंगी। नेति करने से ना तो दिमाग के अंदर क्लॉट होगा ना ही दमे की बीमारी होगी। अगर हम नेती नहीं करते और दुखी रहते हैं तो इसके लिए हम खुद जिम्मेदार हैं। नेति कई बीमारियों के उपचार के लिए रामबाण है। नाडी शोधन प्राणायाम से हम नाड़ियों को ठीक कर सकते हैं। इसमें पूरक, कुंभक व रेचक महत्वपूर्ण हैं।












