
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। एडवोकेट नवजिंदर सिंह बेदी, जिला न्यायालय होशियारपुर ने पंजाब सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) जारी करने में की जा रही देरी और इस पूरे मामले में सरकार के रवैये पर कड़ी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार आज महंगाई भत्ता जारी करने को अपने कर्मचारियों के लिए किसी विशेष तोहफे या सरप्राइज के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि महंगाई भत्ता न तो सरकार की कोई सौगात है, न इनाम और न ही उसकी उदारता का प्रतीक। यह सरकारी कर्मचारियों का कानूनी एवं जायज अधिकार है, जिसे समय पर देना सरकार की जिम्मेदारी है।

यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कर्मचारियों को अपने ही वैध अधिकारों को प्राप्त करने के लिए बार-बार न्यायालयों का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। कर्मचारियों के प्रति सरकार का रवैया शुरू से ही गंभीर चिंता का विषय रहा है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय को अवमानना की कार्यवाही के दौरान सख्त रुख अपनाना पड़ा तथा पंजाब के मुख्य सचिव के. ए. पी. सिन्हा को ₹1 लाख जमा करवाने के निर्देश देने पड़े।
एडवोकेट बेदी ने कहा कि सरकारी कर्मचारी अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष जनसेवा में समर्पित करते हैं। ऐसे में उन्हें सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और अपने वैध वित्तीय लाभ समय पर मिलने चाहिए। अपने ही अधिकारों के लिए कर्मचारियों को लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर होना किसी भी जिम्मेदार सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि अपनी कानूनी और संवैधानिक जिम्मेदारी निभाना कोई एहसान नहीं होता। कर्मचारी सरकार से कोई खैरात या दान नहीं मांग रहे, बल्कि अपने मेहनत और सेवा के बदले मिलने वाले जायज अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
अंत में उन्होंने पंजाब सरकार से मांग की कि कर्मचारियों की सभी लंबित डीए किस्तें एवं बकाया राशि बिना किसी और देरी के जारी की जाएं, माननीय न्यायालय के आदेशों का सम्मान किया जाए तथा कर्मचारियों के विश्वास को बहाल करने के लिए संवेदनशील और कर्मचारी हितैषी दृष्टिकोण अपनाया जाए।












