
दिल्ली (द स्टैलर न्यूज़)। भारत सरकार द्वारा सेना में भर्ती को लेकर 17.5 साल से लेकर 21 साल के युवाओं को सुनहरी मौका देने के स्वर्णीम युग की शुरुआत की गई है तथा मात्र 4 साल की नौकरी (अस्थायी) को लेकर युवाओं में कई प्रकार की भ्रांतियां भी पनप रही हैं, जिसके चलते देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका विरोध भी शुरु हो गया है। क्योंकि युवाओं को इस बात का डर है कि 4 साल के बाद अगर वे 25 प्रतिशत में न आए तो वे करेंगे क्या तथा ऐसे में उनके समक्ष सेना में जाकर उज्ज्वल भविष्य एवं देशसेवा का जज्बा चूर-चूर हो जाने का खतरा मंडराएगा। लेकिन युवाओं की इसी दुविधा को देखते हुए गृह मंत्रालय की तरफ से इस योजना के साथ एक और योजना को जोड़ दिया गया है, जिससे लगता है कि युवा अग्निवीर बनकर जहां भारत की तीनों सेनाओं में से एक में सेवा का मौका पा सकेंगे वहीं अगर वे पक्के किए जाने वाले 25 प्रतिशत सैनिकों में नहीं भी आते तो उनके भविष्य को सुरक्षित करते हुए मंत्रालय द्वारा सशस्त्र सुरक्षा बल एवं पुलिस में भर्ती के द्वार खोल दिए गए हैं व यहां उन्हें प्राथमिकता दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है।

गृह मंत्री अमित शाह ने इस संबंधी घोषणा करते हुए कहा कि अग्निपथ के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों को केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीआरपीएफ) और असम राइफल्स में भर्ती में प्राथमिकता मिलेगी। इसके अलावा यूपी, उत्तराखण्ड, हरियाणा एवं मध्य प्रदेश ने पुलिस भर्ती में इन सैनिकों को प्राथमिकता देने की घोषणा की है यानि कि अगर कोई युवक एवं युवती अग्निवीर बनने उपरांत इन प्रदेशों की पुलिस में सेवाएं देना चाहता है तो यह उनके लिए सुनहरा मौका होगा। सेना उपप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने बुधवार को इस संबंधी बताया था तीन माह यानि कि 90 दिनों के भीतर पहली भर्ती की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी तथा 180 दिनों के बाद पहले बैच के चयनित युवा प्रशिक्षण केन्द्रों में होंगे। करीब एक साल के भीतर सभी अग्निवीर बटालियन का हिस्सा बन जाएंगे।
योजना के तहत भर्ती होने वाले युवक का दसवीं पास होना जरुरी है। गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट में कहा कि यह योजना युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक दूरदर्शी कदम है। विस्तृत योजना तैयार करके काम शुरु हो चुका है।
गृह मंत्रालय की इस घोषणा से युवाओं के समक्ष भविष्य में और देश सेवा करने के द्वार खुले हैं। अर्थात अगर कोई युवक 17.5 साल की उम्र में सैनिक बनता है तथा 4 साल का कार्यकाल पूरा करके सेना में पक्के तौर पर आगे की सेवा में चयनित नहीं होता तो उसके समक्ष देश सेवा के अन्य मौके भी द्वार खोले खड़े होंगे। चार साल की सेवा के बाद उसकी उम्र होगी साढे 21 साल होगी व उसके खाते में बचत के रुप में लाखों रुपये की नकदी भी होगी। जिससे वह अपना बिजनेस तो कर ही करता है साथ ही सशस्त्र पुलिस बल एवं उक्त राज्यों द्वारा पुलिस भर्ती में प्राथमिकता का भी लाभ ले सकेंगे। इतनी छोटी उम्र में 10 से 15 लाख रुपये जेब में होने से युवाओं के हौंसले वैसे ही बुलंग होंगे। दूसरी तरफ अगर कोई युवा 21 साल की उम्र में भर्ती होता है तो वह मात्र 25 साल की उम्र में सेवा उपरांत उक्त भर्तियों में खड़ा होकर भविष्य का चयन कर सकेगा। अगर देखा जाए तो साढे 17 साल से 21 साल तक के युवा 25 साल में सेना का हिस्सा बनकर घर वापिस आ जाएंगे और पुन: अपनी इच्छा एवं रुचि अनुसार अपने लिए उज्ज्वल भविष्य का चयन कर पाएंगे।
इतना ही नहीं अगर वे सक्षम होंगे तो उन्हें सेना में ही सेवाओं को जारी रखने का सुनहरी मौका मिलेगा। जैसा कि योजना के तहत बताया गया है कि इस योजना के तहत भर्ती होने वाले 25 प्रतिशत युवाओं की सेवाओं को रेगुलर किया जाएगा। इसलिए युवाओं के समक्ष सेना में रह कर ही सेवाएं निभाने का मौका होगा। विशेषज्ञों के अनुसार युवाओं को इस योजना के प्रति जागरुक करने के लिए सरकार को सार्थक कदम उठाने चाहिए और सशस्त्र पुलिस बल एवं पुलिस भर्ती में उन्हें क्या लाभ मिलेगा तथा उनकी सेवाएं कितनी सुरक्षित होंगी के बारे में भी बताना चाहिए ताकि उन्हें कोई गुमराह न कर सके।












