
कपूरथला (द स्टैलर न्यूज़), गौरव मढ़िया: धार्मिक मान्यता के अनुसार कार्तिक मास की शुक्लपक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी का त्योहार मनाने की परंपरा रही है। बुधवार को गोपाष्टमी थी।इस कारण शहर की गोशालाओं में धार्मिक विधि-विधान द्वारा गो माता की पूजा की गई। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रमों में गौ-रक्षा का संकल्प लिया गया।पूजन कार्य से पहले लोगों द्वारा गोशाला स्थल की साफ-सफाई की गई तथा गाय माता को स्नान कराया गया।वहीं,नए वस्त्र धारण कराए गए। इस दौरान मंदिर ब्रह्मकुंड गोशाला परिसर में आयोजित कार्यक्रम में गौशाला कमेटी के पूर्व अधक्ष्य व विश्व हिन्दू परिषद् जालंधर विभाग केअधक्ष्य नरेश पंडित एवं बजरंग दल के शहरी प्रधान चंदन शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चारण से गौ माता का पूजन कर गौ माता का आशीर्वाद लिया। वहीं, समाज कल्याणार्थ सामूहिक रूप से यज्ञ हवन कर विश्व शांति का संदेश दिया गया।

इस अवसर पर नरेश पंडित ने गोशाला के उत्तरोतर विकास की कामना करते हुए कहा कि गौ में करोड़ों देवताओं के वास हैं, इसकी सेवा करने से जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं। नरेश पंडित ने गोशाला से जुड़कर गाय माता की सेवा करने की लोगों से अपील करते हुए कहा कि गौ रक्षा का मामला आस्था, संस्कृति व आध्यात्मिक भावना से जुड़ा होने के साथ-साथ उसके आर्थिक, सामाजिक व वैज्ञानिक पहलू से भी महत्त्वपूर्ण हैं। जहां वैदिक काल से गौ हत्या प्रतिबंधित थी, वहीं मुगल शासकों ने भी निषेध का प्रयास किया था। परन्तु वह भी अपनों के ही कारण सफल नही हो सके। आज गौ-पालन और रक्षण के लिए भाजपा सरकारें संकल्पबद्ध हैं,इससे पूर्व गऊवंश की क्या स्थित थी यह जगजाहिर है।उन्होने कहा गौ सेवा, गौ रक्षा तथा गौ संवर्धन एक तपस्या है। जिसके साधकों का मार्ग निष्कंटक रहे, इस हेतु सभी गौ भक्तों, समाज शास्त्रियों, राजनेताओं के साथ धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों को कार्य करना पड़ेगा।नरेश पंडित ने कहा अपने देश में गौ-पालन और गौ-पूजा का महत्व बहुत है।
भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी अभिरुचि इस दिशा में सबसे अधिक प्रदर्शित करके सर्वसाधारण का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था कि उन्हें गौ का महत्व और उपयोग भली प्रकार समझना चाहिये और इस संदर्भ में व्यवहारतःकुछ करते रहना चाहिए। उन्होंने ने कहा मानवी स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जिस पौष्टिक आहार की आवश्यकता है, उसमें गौ दुग्ध अग्रणी है।यों दूध तो भैंस और भेड़-बकरी का भी मिलता है और कहीं-कहीं गधी और ऊँटनी का भी प्रयुक्त होता है पर विटामिन ए जैसे बहुमूल्य तत्त्व जितनी मात्रा में गाय के दुग्ध में है, उतनी और किसी में नहीं। देखने में भैंस या भेड़ का दूध चिकना, गाढ़ा निकलता है पर गुणों में गोदुग्ध से उनकी कोई तुलना नहीं की जा सकती है।उन्होने कहा सरकार गौ सेवा के प्रति संवेदनशील है।परन्तु प्रशासन को भी अपने दायित्व का बोध होना चाहिए।सड़को पर नागरिकों और खेत खलिहानों मे किसानों को छुट्टा गौवंश से राहत दिलाने का काम प्रशासन का है। जिसमे वह गंभीर नही है। उन्होंने कहा कि गाय का लुप्त होना वैदिक संस्कृति के लिये अशुभ संकेत हैं। सभी पालतू पशुओ में गौवंश कलयुग में सबसे ज्यादा संकट में हैं।
यदि सरकार ने इसके लिये सकारात्मक प्रयास न किए तो गाय पूरी तरह विलुप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश में पशुओं की नस्ल सुधारने के लिए अनेक कार्यक्रम चलाये गए। लेकिन सुधार के नाम पर देशी की जगह विदेशी नस्ल हावी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद कीटनाशक जहर व ट्रैक्टर निर्माण करता बडी-बडी कंपनियों ने गौवंश के स्थान पर कब्जा कर उसे हाशिए पर ढकेल दिया हैं।इस कारण किसान पशुओं को पालन का काम न करके बल्कि ट्रैक्टरों पर आधारित कृषि करने लगा हैं।इसका सीधा असर गोवंश पर पडा हैं। कहा कि गाय हमारी वैदिक संस्कृति की पोषक हैं।
भगवान कृष्ण न ही असीम सेवा करके वैदिक संस्कृति की रक्षा करने का काम किया था इसलिये हम सभी का दायित्व बनता है कि गाय की पूजा-अर्चना के साथ उसको बचाने का भी प्रयास करें। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के प्रधान राकेश कुमार साही, वरिंदर गौर आशीष शर्मा, नवीन गर्ग, अरुण महिंद्रू, अश्विनी अरोडा, विक्की चोपड़ा, बजरंग दल के जिला प्रभारी राजकुमार अरोडा, गौ सुरक्षा प्रमुख विजय ग्रोवर, जिला उपप्रधान पवन शर्मा, गगन शर्मा, आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता परमिंदर सिंह ढ़ोत, व्यापर मंडल के प्रधान कंवर इक़बाल सिंह आदि लोग मौजूद रहे।











