
होशियारपुर(द स्टैलर न्यूज़)रिपोर्ट: गुरजीत सोनू। पंजाब स्कूल टीचर्स यूनियन ने शिक्षा विभाग की ओर मिडिल स्कूलों के लिए बनाई जा रही रेशनेलाइजेशन-2018 को चुनौती दी है।पंजाब स्कूल टीचर्स यूनियन के संरक्षक बहादुर सिंह ने बताया कि जल्द ही शिक्षा मंत्री के नाम एक ज्ञापन डीईओ को सौंपकर रेशनेलाइजेशन नीति पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया जाएगा। पंजाब स्कूल टीचर्स यूनियन के सचिव बलबीर सिंह ने कहा कि नीति की प्रस्तावना एवं हिदायत में कहीं भी गुणात्मक शिक्षा का उद्देश्य नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि मिडिल स्कूलों से आर्ट एंड क्राफ्ट और पी.टी.आई मे से एक पोस्ट रखना सरासर गलत है।

इसी के साथ पंजाबी अथवा हिंदी अध्यापक में से एक पोस्ट रखना शिक्षा के अधिकार की अवहेलना है। उन्होंने कहा कि लगता है कि सरकार भटक गई है जो भाषा को इस कदर नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यह नीति लागू होने पर स्कूली शिक्षा के प्रति सरकार की सोच पर किसी न किसी रूप में प्रश्न लगने के आसार बन सकते हैं। इसके साथ ही नीति अपने असल उद्देश्य से भटक गई प्रतीत होती है क्योंकि यह भाषा और क्लासिकल एंड वैंकूवलर अध्यापकों के प्रति भेदभाव दर्शाती है।
-मिडिल स्कूल से अध्यापकों को किया जा रहा है सर प्लस
इस नीति से पंजाब के सरकारी स्कूलों के हजारों भाषा व पीटीआई और आर्ट एंड क्राफ्ट अध्यापकों का का उजाड़ा होगा, वहीं लाखों विद्यार्थियों के लिए भी नुकसानदेह साबित होगी।अध्यापकों द्वारा हस्ताक्षरित इस मांगपत्र में रेशनेलाइजेशन-2018 पर दोबारा विश्लेषण करने की मांग उठाई है । इस अवसर पर अध्यक्ष मनजीत सिंह टांडा, ब्लॉक प्रधान गुरमेल सिंह मिर्जापुरी, जगमोहन सिंह कोषाध्यक्ष, मदनलाल शर्मा, हरविंदर सिंह, सहित पंजाब स्कूल टीचर्स यूनियन के अन्य सदस्य मौजूद थे।












