
कपूरथला (द स्टैलर न्यूज़), गौरव मढ़िया। 29 जून को होने वाली रथ यात्रा के उपलक्ष में मंगलवार को इस्कान कपूरथला की ओर से चोथी संध्या फ़ेरी बड़ी ही धूमधाम से निकाली गई। इस संध्या फेरी का आयोजन अजीत नगर के भक्तों के द्वारा किया गया! भगवान श्री श्री कृष्णा बलराम के पवित्र महामंत्र गायन में झूमते गाते भक्तों का सैलाब देखने को मिला। जिससे पता चलता है कि भगवान की रथ यात्रा को लेकर शहर वासियों के हृदय में असीम उत्साह है। भगवान श्री श्री कृष्णा बलराम तथा श्री जगन्नाथ जी की सुंदर पालकी के दर्शन करके भक्तों ने उत्साह तथा श्रद्धापूर्वक भगवान के नाम की जय जयकार की। पदम पुराण में कहा गया है कि जो भगवान के रथ तथा पालकी के आगे भावपूर्ण नृत्य करता है उसके कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं । ऐसा ही सुंदर नृत्य कल अजीत नगर में भक्तों द्वारा पालकी के समक्ष किया गया। मोहल्ले वालो ने पुष्प वर्षा के साथ भगवान का भवय स्वागत किया। अनेक प्रकार के व्यंजन तथा स्वादिष्ट खाद्य पदार्थो का भोग भगवान को अर्पित किया गया तथा भक्तों में बांटा गया।

संध्या हरिनाम का शुभारंभ मनीष बुधवार (अजीत् अवेनुए) जी के निवास स्थान से शुरू होकर मनीष कटोच जी के निवास स्थान पर जाकर बड़ी ही धूमधाम से समाप्त हुआ। भगवान जगन्नाथ जी की कथा का गुणगान करते हुए इस्कॉन के वरिष्ठ वैष्णव संचालक नीरज अग्रवाल (नकुल दास) जी ने भक्तों को भगवान की वाणी का संदेश देते हुए बताया कि भगवान जगन्नाथ जी की गोल आंखें हैं और उन पर पालकी भी नहीं है तथा भगवान जगन्नाथ जी अपनी आंखों को कभी झपकते ही नहीं , इसका कारण ये है कि भगवान जगन्नाथ जी नही चाह्ते कि कोई भी भक्त उनकी क्रिपा दृष्टि से वंचित रह जाये, उनकी आखे360 डिग्री की तरह गोल घुमती है। जिससे हर कोई भगवान जगन्नाथ जी की कृपा प्राप्त कर पाता है।
इसलिए भगवान घर-घर जाकर अपने सभी भक्तों पर प्रेम भरी कृपा दृष्टि डालते हैं तथा उनके अनेक दुखों को हर लेते हैं तथा अपने भक्तों की हर प्रकार की सेवा को स्वीकार करते हैं।आगे बताते हुये नीरज अग्रवाल (नकुल दास) जी ने कहा की 29 जून को सभी शहर निवासियो के सहयोग के साथ भगवान की दिव्य रथ यात्रा निकाली जायेगी। रथ यात्रा से पूर्व यह 40 हरिनाम संध्या फेरिओं से हम सभी का हृदय शुद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि भगवान् हमारे हृदय में प्रवेश कर सकें।
जिसके लिये प्रभु जी बड़े प्रेम से शहर वासियों से निवेदन करते हैं कि हर दिन संध्या हरिनाम फेरिया में शामिल हो ताकि रथ यात्रा के पूर्व हम शुद्ध प्रेम भाव को ग्रहण कर सके तथा रथ यात्रा वाले दिन दिव्य रथ की रस्सी को खींचकर 84 लाख की योनियों के चक्र को तोड़ते हुए भागवतधाम प्राप्त कर सकें। इस पवित्र हरि नाम रूपी भगवान श्री श्री कृष्णा बलराम जी की प्रेम धारा में पूरा शहर भावपूर्ण होता जा रहा है। भक्तों की संख्या भी बढ़ रही है तथा उनका भगवान के प्रति उत्साह भी इस संध्या फेरी के माध्यम से बढ़ रहा। कलयुग के दुष्प्रभाव को नष्ट करने में भगवान के पवित्र दर्शन तथा उनके पवित्र नाम का गुणगान ही एकमात्र साधन है।












