
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। विद्या भारती पंजाब द्वारा निर्देशित होशियारपुर संकुल का आचार्य प्रशिक्षण वर्ग सर्वहितकारी विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी होशियारपुर में प्रधानाचार्य व संकुल प्रमुख अरुण पुंज जी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इस वर्ग का शुभारंभ दीप प्रज्वलित करके एवं सरस्वती वंदना से किया गया। इसके उपरांत अतिथियों का परिचय प्रदान किया गया। इस अवसर पर स्थानीय विद्यालय व होशियारपुर संकुल के अंतर्गत सर्वहितकारी विद्या मंदिर बस्सी वाजीद के लगभग 28 अध्यापकों ने प्रतिभाग किया। इस वर्ग के अंतर्गत उद्बोधन एवं चर्चात्मक विषयों का प्रतिपादन किया गया।

प्रथम सत्र में शारीरिक सबलता एवं एकाग्रता को बढ़ाने के लिए समता का विषय लिया गया, जिसे विद्यालय के शारीरिक एवं योग के आचार्य श्री राकेश कुमार ने लिया। उन्होंने इसमें समता से संबंधित व्यायामों का अभ्यास करवाया। द्वितीय सत्र में ‘विद्या भारती की विकास यात्रा’ इस विषय पर होशियारपुर विभाग के विभाग सचिव श्री भानु प्रताप सिंह ने सभी का मार्गदर्शन किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि विद्या भारती भारत ही नहीं अपितु विश्व का सबसे बड़ा शिक्षण संगठन है, जो निरंतर अपने विकास की ओर अग्रसर हो रहा है। तृतीय सत्र स्थानीय विद्या मंदिर होशियारपुर के प्रबंध समिति के प्रधान भारत गंडोत्रा जी के द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने ‘मूल्य शिक्षा’ से संबंधित विषय वस्तु को सभी अध्यापकों के समक्ष रखा। उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि अगर देश को सुदृढ़ और समृद्ध बनाना है तो छात्रों में मूल्य शिक्षा के आधारित शिक्षण करवाना अति आवश्यक है, क्योंकि आज के छात्र ही कल के नेता हैं उनमें ऐसे गुणों का विकास करना बहुत ही आवश्यक है।
चतुर्थ सत्र का प्रारंभ भोजन के उपरांत किया गया, जिसमें चर्चात्मक विषय ‘विद्या भारती का आचार्य’ इस विषय पर चर्चा की। इस विषय का प्रस्तुतीकरण सर्वहितकारी विद्या मंदिर बस्सी बाजीद की प्रधानाचार्या तृप्ता देवी जी द्वारा किया गया। सभी अध्यापकों ने विद्या भारती का आचार्य कैसा हो, उसमें कौन-कौन से गुण हों, विद्या भारती का आचार्य अन्य अध्यापकों के किस प्रकार भिन्न है। इस विषय पर सभी ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। पंचम सत्र समापन सत्र का रहा। जिसमें प्रधानाचार्य श्री अरुण पुंज ने ‘नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन’ इस विषय पर नई शिक्षा का स्वरूप और विशेषताएं सबके समक्ष रखी। उन्होंने नई शिक्षा नीति के विषय में विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की। इसी के साथ-साथ पिछले चारों सत्रों में अध्ययन किए गए सभी विषयों पर चर्चा की एवं सभी आचार्य-दीदियों ने उपरोक्त सभी विषयों को समझकर सकारात्मक रूप में अपने शिक्षण में प्रयोग करने के लिए आश्वासन दिया। अंत में सुखना मंत्र के साथ इस प्रशिक्षण वर्ग के द्वितीय दिवस का समापन सफलतापूर्वक हुआ।












