
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के गौतम नगर स्थित आश्रम में धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी अंजलि भारती ने इस अवसर पर कहा कि इतिहास गवाह है कि जिसने अपनी प्रीति ईश्वर से जोड़ी, उसका जीवन नवीनता के सांचे में बदल गया। उन्होंन कहा कि प्रभु- प्रेम की राह पर बढ़े उसके कदम पूर्णतः निर्माणकारी व कल्याणकारी सिद्ध हुए। उदाहरणतः पत्नी के मोह में उलझे हुए तुलसीदास जी एक भी पल अपनी पत्नी को देखे बगैर रह नहीं पाते थे। इस कारण उपहास का विषय बने हुए थे परंतु जब संत नरहरिदास जी की कृपा से प्रभु की ओर उन्मुख हुए, तभी सच्ची प्रीत व श्रद्धा से अवगत हो पाए।

ईश्वर प्रेम की राह पर चलकर फिर यही तुलसीदास जी सबकी नजरों में पूजनीय बन गए। । दूसरे उदाहरण में उन्होंने राजा अशोक का जिक्र किया। उसे प्रीति थी राज्य से, धन-संपत्ति से। इसकी चाह में उसने न जाने कितने ही कत्ल किए कितनी लाखों स्त्रियों की मांग उजाड़ दी, कितने बच्चों को अनाथ कर डाला और फिर नी विशाल राज्य का स्वामी बन गया। कदमों में उसके धन संपदा का अंबार लग गया लेकिन अंदर से वह दुःखी यह अशांत ही रहा। फिर एक दिन एक बौद्ध भिक्षु उसके जीवन में आए। उन भिक्षुओं द्वारा राजा अशोक को सत्य की अनुभूति कारवाई गयी ,उसे आत्मज्ञान दिया गया।
उन्होंने इसकी प्रीत का रुख संसार से हटाकर ‘करतार’ की और मौड़ दिया। उन्होंने बताया कि केवल प्रेम का सागर ईश्वर ही है। उससे जोड़ी गई प्रीत ही हमारा निर्माण व कल्याण करती है। उसी की प्रीत सुखदायी है। अंत में साध्वी वीना भारती जी द्वारा सुमधुर भजनों का गायन किया गया।










