
हमीरपुर (द स्टैलर न्यूज़), रजनीश शर्मा। स्कूल गोद लेने का कार्यक्रम एक सराहनीय पहल है, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति या संस्था किसी सरकारी विद्यालय को गोद लेकर उसकी शिक्षा, भौतिक सुविधाओं और समग्र विकास में सहायक बनती है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल इमारतों की मरम्मत या संसाधनों की उपलब्धता भर नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार, विद्यार्थियों को सशक्त वातावरण प्रदान करना और समुदाय को शिक्षा से भावनात्मक रूप से जोड़ना भी है। इसी दिशा में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (उत्कृष्ट), टौणी देवी निरंतर अग्रणी भूमिका निभा रही है। “मेरा स्कूल, मेरा अभिमान” जैसी पहल को विद्यालय प्रशासन ने केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक अभियान के रूप में आत्मसात किया है। इस अभियान का मूल उद्देश्य विद्यालय के भौतिक ढांचे के साथ-साथ विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं समाज के बीच आत्मीय संबंधों को मज़बूत करना है। शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार और विद्यार्थियों को अनुकूल एवं प्रेरणादायक वातावरण प्रदान करने के लिए विद्यालय प्रशासन, शिक्षक वर्ग, छात्र समुदाय तथा अभिभावकगण सामूहिक रूप से प्रयासरत हैं। इस सहयोग भावना की एक अनुकरणीय मिसाल उस समय देखने को मिली जब गांव दरकोटी (गाहरा) की कौशल्या देवी ने अपने स्वर्गीय पति सूबेदार सीता राम चौहान की स्मृति में विद्यालय के विकास हेतु ₹40,000 का उदार दान प्रदान किया। उनका यह भावनात्मक और सामाजिक रूप से जागरूक कदम न केवल विद्यालय में आवश्यक सुविधाओं के विस्तार में सहायक होगा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा की अमिट छाप भी छोड़ेगा। इस अवसर पर आयोजित एक सादगीपूर्ण समारोह में विद्यालय के प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा ने यह राशि उनके सुपुत्र प्रवीण चौहान (सेवानिवृत्त प्रवक्ता एवं विद्यालय के पूर्व छात्र) से प्राप्त कर आभार व्यक्त किया।

अपने संबोधन में प्रधानाचार्य ने कहा कि विद्यालय की मजबूती केवल ईंट-पत्थरों से नहीं होती, बल्कि ऐसे संवेदनशील, जागरूक और समर्पित पूर्व छात्रों एवं समाज के योगदान से होती है। कौशल्या देवी द्वारा दिया गया यह योगदान भले ही राशि में सीमित हो, परंतु इसकी भावनात्मक एवं प्रेरणात्मक महत्ता अत्यंत विशाल है। यह समाज के उन सभी लोगों के लिए भी संदेश है, जो शिक्षा की नींव को सशक्त बनाने के इच्छुक हैं। प्रवीण चौहान, जो स्वयं इसी विद्यालय के छात्र रह चुके हैं और जिन्होंने अपने शैक्षिक जीवन की शुरुआत जनवरी 1989 में इसी विद्यालय से की थी, ने कहा, “यह विद्यालय मेरे जीवन की नींव है। जो कुछ भी मैं आज हूँ, उसका श्रेय इस संस्था को जाता है। यह योगदान मेरे पिता की स्मृति में एक विनम्र श्रद्धांजलि है, ताकि आने वाले छात्र बेहतर सुविधाओं में शिक्षा प्राप्त कर सकें।” उन्होंने अन्य पूर्व छात्रों से भी आह्वान किया कि वे अपने-अपने स्तर पर विद्यालय से पुनः जुड़ें और इसे समृद्ध बनाने में योगदान दें।












