
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। निगम प्रशासन द्वारा यह दावे किए गए हैं कि युद्ध स्तर पर अमृतसर शहर को सुंदर बनाने का काम शुरू कर दिया गया है और जो विवरण उन्होंने दिया है उसमें गोल्डन गेट से शुरू करके वहीं से संभवत: समाप्त भी कर दिया है। आज तक निगम यह उत्तर नहीं दे पाया कि अमृतसर शहर किसे मानते हैं। वहीं पुरानी बात अमृतसर के पुराने शहर को इनके काम में कोई स्थान नहीं। केवल नए बने बड़े—बड़े बंगलों वाले मोहल्ले और सिविल लाइन को सुंदर बनाना ही इनके एजेंडे में है। आज भी जो सरकारी घोषणा हुई है कि अमृतसर की वर्षगांठ पर बारह दरवाजों को विरासती रूप दिया जाएगा, लेकिन बारह दरवाजों के अंदर बने असली अमृतसर के लाखों लोगों को कोई राहत देने की बात यह सरकार कभी नहीं करती।

मेरा निगम प्रशासन से यह सीधा सवाल है कि जिस शहर में कूड़े के ढेर हैं। आवारा जानवर हैं, बिजली की लटकती तारें हैं, मच्छर मक्खियां और कुत्तों के झुंड काटने के लिए हैं, क्या उस अमृतसर को साफ सुथरा करना, संवारना उनके काम का हिस्सा नहीं? पुराने शहर को सुंदर न बनाओ, साफ तो बना दीजिए। अमृतसर के पुराने शहर में जगह जगह मांस मछली की दुकानें और गंदगी फैली है। निगम प्रशासन को तो अभी तक यह पता भी नहीं होगा कि किस गली बाजार की क्या समस्या है। न काउंसिलर देखते हैं और न ही विधायक और सांसद। आखिर जनता को किसके भरोसे छोड़ा है?












