
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। ‘अमृतम डिवाइन वैली’ में आयोजित चार दिवसीय सोनालीका अमृतम वैलनेस रिट्रीट आत्मानुभूति की अमिट छाप छोड़ गया। गौरतलब है कि उत्तर भारत से आध्यात्मिक जिज्ञासुओं का समूह अमृतम फाउंडर एवं सुविख्यात स्पिरिचुअल ग्रैंड मास्टर संगीता मित्तल के सानिध्य में चार दिनों की ध्यान की यात्रा और स्वयं को जानने की विधि सीखने के लिए लिए पहुंचा। संगीता मित्तल ने अमृतम क्रिया एवं अन्य विधियों के माध्यम से इन जिज्ञासुओं की आध्यात्मिक पिपासा को शांत किया और उन्हें 21 दिन के निरंतर अभ्यास के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यात्रा तो सभी को स्वयं ही करनी है और मेरा कार्य तो केवल आप सभी को वाहन पर सवार करवा कर मार्गदर्शन करना है। मंजिल का स्वाद भी स्वयं को ही चखना होता है और यह स्वाद तो ऐसा है, बताया भी नहीं जा सकेगा।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को समर्पित भक्ति रस ने भी मोह लिया मन
रिट्रीट के दौरान आध्यात्मिक मार्गदर्शक श्रीमती मित्तल ने चार दिन निरंतर अलग अलग अंतराल में अमृतम मेडिटेशन करवाई। उन्होंने कहा कि अमृतम एक क्रिया है है स्वयं को जानने की, निरंतर 21 दिन की मेहनत, कोशिश, अभ्यास से हमें सकारात्मक सोच के साथ अपना जागरूक होने का लक्ष्य हासिल करना है और और जागरूक व्यक्ति ही बुद्ध है यही एक सत्य है। अमृतम एक सफर है अहम् से आत्मा तक का क्योंकि हम जो है जो हमें लगता है हम उससे कहीं अधिक हैं और इस जीवा मैं हमने पिछले जो अध्याय अधूरे छोड़े हैं , उन्हें पूरा करना है। इसके बाद नेचर वाक के जरिये सभी ने पूरी वैली के कुदरती वातावरण का आनंद उठाया और आर्ट मैडिटेशन में सबने नेचर आर्ट और ब्लाइंड फोल्ड मेडिटेशन में स्वानुभूति की। रिट्रीट के दौरान हर दिन भक्ति रस के माध्यम से साधकों को आनंदित किया गया और ख़ास तौर पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी को समर्पित संगीतमयी भक्ति गायन ने तो सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस भक्तिमयी संध्या में सोनालीका ग्रुप के वाइस चेयरमैन अमृतसागर मित्तल ने भी शिरकत की। रिट्रीट में भाग लेने वाले साधकों ने श्रीमती मित्तल के साथ अमृतम वैली में नवनिर्मित शिव मंदिर में पूजा अर्चना भी की।
चौथे दिन की अंतिम सुबह माइंडफुल जर्नी के दौरान संगीता मित्तल ने जिज्ञासुओं के प्रश्नों के उत्तर भी दिए. जिज्ञासुओं द्वारा समय समय पर आने वाले प्रश्नों के उत्तर भी सोशल मीडिया ग्रुप में मैडम द्वारा दिए जा रहे है। इससे पहले सभी ने अपने अपने रिट्रीट के अनुभव साझा किये। अपने सम्बोधन में श्रीमती मित्तल ने कहा और कहा कि हम सब यहां अपना अपना किरदार निभाने आए हैं और स्क्रिप्ट साथ लेकर आये हैं। इसलिए अगर हम जिंदगी में सफलता पाना चाहते हैं तो हमे किरदार निभाना है लेकिन किरदार बनना नहीं है। वास्तव में हमारी सोच, हमारी भावना ब्रह्माण्ड में प्रतिध्वनि करती है, गूंजती है और आवृत्ति होती है और कई गुना होकर परिणाम के रूप में हमें मिलती ही है। इसलिए कम बोलो लेकिन अच्छा बोलो। कुछ भी सोचने से पहले सोचें कि मैं किसी के बारे बुरा तो नहीं सोच रहा, कुछ भी बोलने से पहले भी सोचें। क्योंकि हम जो चाहते है कि यह हो, किसी न किसी समय हो ही जाता है. इसलिए स्मृद्धि पाने के लिए ब्रह्माण्ड के साथ हमेशा अच्छी भावनाओं द्वारा ट्यूनिंग करें। अपनी फ्रीक्वेंसी को सर्वोच्च शक्ति की फ्रीक्वेंसी से जोड़ें और उस सर्वोच्च शक्ति की फ्रीक्वेंसी सिर्फ और सिर्फ प्रेम है, एकात्मता है, परम आनंद है। ब्रह्माण्ड की कोई भाषा नहीं होती केवल भाव ही काम करते है। इसलिए यह बात तो निश्चित है कि अमृतम रिट्रीट के पश्चात हरेक साधक अगर निरंतर अच्छी सोच के साथ अभ्यास करेगा तो वह सब कुछ हासिल कर सकता है और मोक्ष एवं आध्यात्मिक उन्नति की चरम सीमा पर पहुँच सकता है। अमृतम वैलनेस रिट्रीट के अंतिम दिन साधकों के समूह को अमृतम सर्टिफिकेट्स भी दिए। इस आवासीय मेडिटेशन रिट्रीट के दौरान चारों दिन पूर्णतया सात्विक फार्म फ्रेश ऑर्गेनिक भोज का भरपूर आनंद साधकों ने उठाया।












