
राजनीति भी गजब चीज है, जिसने साथ दिया वह पराये हो जाते हैं औऱ पराये कब अपने हो जाएं पता भी नहीं चलता। क्योंकि, राजनीति में शह और मात का खेल खेलने वाले अपनी सत्ता कायम रखने के लिए पार्टी की नीतियों के विपरीत जाकर भी अपना झंडा बुलंद रखने की कोई न कोई नीति एवं मार्ग खोज ही लेते हैं। ऐसा पिछले दिनों उस समय देखने को मिला था जब एक कोआपरेटिव बैंक के चुनाव के दौरान अकालियों ने आप का साथ देकर विधायक जी के करीबी को चेयरमैन पद पर आसीन कर दिया था। खैर जीत तो जीत होती है, वह कैसी व किसी भी तरीके से हो, राजनीति में यह मैटर नहीं करता।

स्टैलर चुटकी
अब इसी बैंक के उपचेयरमैन के चुनाव होने वाले हैं। अब विधायक जी एवं चेयरमैन साहिब बुरे फंसे हुए हैं। एक तरफ हैं वह अकाली जिन्होंने उनके पक्ष में अपना पक्ष जताकर उनके करीबी को चेयरमैन के पद पर आसीन किया था और अब अकालियों को उम्मीद है कि विधायक जी एवं चेयरमैन साहिब उनका साथ देकर उनके साथी को उपचेयरमैन के पद पर आसीन करेंगे। दूसरी तरफ आप की बात की जाए तो सूत्रों के अनुसार हाईकमान से सख्त निर्देश हैं कि जितने भी उपचेयरमैन बनने वाले हैं वह सभी आप के ही हों तथा किसी अन्य पार्टी को किसी भी तरह से समर्थन न दिया जाए। ऐसे में नेता जी के समक्ष असीब सी दुविधा खड़ी हो गई है। पार्टी सूत्रों से जानकारी मिली है कि अपना किया वायदा निभाने के लिए एक तरफ नेता जी अंदर खाते जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ आप के अन्य विधायकों के समर्थित सदस्यों में से ही उपचेयरमैन लगाए जाने की कवायद की जा रही है।
ऐसे में देखना यह होगा कि क्या विधायक जी एवं चेयरमैन साहिब अकालियों से किया वायदा पूरा कर पाएंगे या फिर पार्टी के आदेशों के आगे वर्षों की यारी कुर्सी पर दे मारी वाली कहावत को चरितार्थ किया जाता है। फिलहाल इस मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार पूरी तरह से गर्म है। ऐसा इसलिए भी है कि कोआपरेटिव बैंक के चेयरमैन के पद पर लंबे समय अकालियों का राज रहा है और उनके कहने एवं इशारे पर ही खेल चलता रहा है और मौजूदा समय में भी उनकी तूती बोलती है।
वैसे भी आप के खिलाफ जो माहौल बन रहा है, उससे रुख कुछ और ही बयान हो रहा है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में किस्सा कुर्सी का क्या रंग दिखाता है, जिस पर अकाली दल, भाजपा, कांग्रेस के साथ-साथ आप की नज़र टिकी हुई है। मुझे दें इजाजत। जय राम जी की।












