
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज) नीरज धीमान: भारत सरकार के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के दिशा-निर्देशों पर अब पंजाब के कई स्कूलों में ‘इको क्लब’ अपनी सक्रिय भूमिका निभाने जा रहे हैं। पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम (EEP) के तहत जिलों के सरकारी मिडिल, हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के बजाय व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है।
पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (PSCST) की निगरानी में चलने वाले इस प्रोजेक्ट के तहत स्कूलों के सक्रिय इको क्लबों को 10,000 रुपये की ग्रांट जारी की गई है। यह राशि पीएफएमएस (PFMS) के माध्यम से सीधे स्कूलों के खातों में भेजी गई है।
इन 7 थीम पर होगी वर्कशॉप
स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मिशन लाइफ के तहत किन्हीं एक या दो विषयों पर हैंड-ऑन वर्कशॉप आयोजित करें। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

- सिंगल यूज प्लास्टिक को ना कहना: जूट या कपड़े के बैग बनाना।
- कचरा प्रबंधन: पेपर रिसाइक्लिंग और खाद बनाना (वर्मी कंपोस्टिंग)।
- ई-वेस्ट मैनेजमेंट: पुराने और टूटे बिजली के सामान से सजावटी वस्तुएं तैयार करना।
- जल संरक्षण: बेकार पड़े सामान से टपक सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) के मॉडल बनाना।
- सतत जीवन शैली: स्कूल में किचन गार्डन तैयार करना और हर्बल पौधों का महत्व समझाना।
बजट का ऐसे करना होगा इस्तेमाल
विभाग ने ग्रांट के खर्च के लिए स्पष्ट नियम तय किए हैं। कुल 10,000 रुपये में से:
- 3,000 रुपये वर्कशॉप सामग्री और स्टेशनरी के लिए।
- 3,000 रुपये विद्यार्थियों के रिफ्रेशमेंट (नाश्ते) के लिए।
- 2,000 रुपये रिसोर्स पर्सन (विशेषज्ञ) के मानदेय के लिए।
- 2,000 रुपये बैनर, सर्टिफिकेट और ट्रॉफी जैसे खर्चों के लिए रखे गए हैं।
सोशल मीडिया पर भी दिखेगी बच्चों की प्रतिभा
जिला शिक्षा अधिकारी (सैकेंडरी) अनुसार इन गतिविधियों को 31 मार्च 2026 तक पूरा करना अनिवार्य है। स्कूलों को न केवल ईईपी पोर्टल (eepmoefcc.nic.in) पर फोटो अपलोड करनी होगी, बल्कि फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इसे सांझा करना होगा ताकि आम जनता को भी जागरूक किया जा सके। किसी भी तकनीकी सहायता के लिए स्कूल प्रोजेक्ट साइंटिस्ट डॉ. मंदाकिनी से संपर्क कर सकते हैं।











