
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज), रिपोर्ट-नीरज धीमान। पंजाब सरकार ने मिड डे मील योजना के तहत काम करने वाले हजारों कुक-कम-हेल्परों के हित में एक मानवीय और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है । पंजाब स्टेट मिड डे मील सोसाइटी द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब विशेष परिस्थितियों में कुक-कम-हेल्पर के परिवार के सदस्य (रक्त संबंधी) को उनकी जगह नियुक्त किया जा सकेगा ।
किन परिस्थितियों में मिलेगा लाभ? महानिदेशक स्कूल शिक्षा और सचिव, स्कूल शिक्षा की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है । इस नीति के तहत दो मुख्य स्थितियों में राहत प्रदान की जाएगी:

1. कुक की मृत्यु होने पर: यदि सेवा के दौरान किसी कुक-कम-हेल्पर की मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिवार के सदस्य को प्राथमिकता दी जाएगी ।
2. 60 वर्ष की आयु के बाद असमर्थता: यदि कुक-कम-हेल्पर की आयु 60 वर्ष से अधिक हो जाती है और वे शारीरिक रूप से काम करने में असमर्थ पाए जाते हैं, तो उनकी सहमति से उनके स्थान पर परिवार के सदस्य की नियुक्ति की जा सकेगी ।
किन्हें मिलेगी प्राथमिकता? नियमों के मुताबिक, संबंधित कुक के पुत्र, पुत्री या बहू में से किसी एक सदस्य को ‘तरस के आधार’ पर कुक-कम-हेल्पर के रूप में नियुक्त किया जाएगा । इस कदम का उद्देश्य उन परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुरक्षित करना है जो पूरी तरह से इस मानदेय पर निर्भर हैं।
अधिकारियों को सख्त निर्देश पंजाब स्टेट मिड डे मील सोसाइटी के जनरल मैनेजर ने राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (सेकेंडरी और एलिमेंट्री) को पत्र जारी कर इन निर्देशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा है । इसी क्रम में जिला शिक्षा अधिकारी (एलिमेंट्री), शहीद भगत सिंह नगर ने भी जिले के सभी ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों (BPEO) और स्कूल प्रमुखों को इन आदेशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं ।
यह निर्णय उन ग्रामीण महिलाओं और श्रमिकों के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है जो वर्षों से स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने का काम कर रहे हैं। इससे न केवल अनुभव का लाभ मिलेगा, बल्कि परिवारों की आजीविका भी निरंतर बनी रहेगी।












