Saturday, October 31, 2026
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253 शिक्षकों को नौकरी से हटाने के खिलाफ रोष प्रदर्शन, आदेशों की प्रतियां जलाईं

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार द्वारा 253 मास्टर कैडर शिक्षकों को टर्मिनेट करने के फैसले के खिलाफ आज समस्त शिक्षक संगठनों द्वारा स्थानीय जिला प्रशासनिक परिसर में एकत्रित होने के बाद रोष मार्च निकाला गया। इस दौरान शिक्षक नेताओं द्वारा विभाग की ओर से शिक्षकों को भेजे गए टर्मिनेशन आदेशों की प्रतियां जलाई गईं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के इस शिक्षक विरोधी फैसले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे सरकार की शिक्षक विरोधी, युवा विरोधी और जनविरोधी नीति का जीता-जागता सबूत बताया।आज के रोष प्रदर्शन का नेतृत्व प्रितपाल सिंह चौटाला, सुखदेव सिंह डानसीवाल, सुरजीत राजा, जतिंदर सिंह सोनी, संजीव धूत, सरबजीत सिंह कंग और जरनैल सिंह सीकरी ने किया।

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इस अवसर पर नेताओं ने कहा कि अपने आपको क्रांतिकारी और आम लोगों की हमदर्द कहने वाली सरकार ने 253 शिक्षक परिवारों की रोजी-रोटी पर कुल्हाड़ी मार दी है। सरकार की कथित शिक्षा क्रांति की हवा निकल चुकी है और कथित क्रांतिकारियों की सरकार का रोजगार छीनने वाला असली चेहरा जनता के सामने बेनकाब हो चुका है। जो सरकार चुनावों के समय रोजगार देने के बड़े-बड़े वादे करती थी, वही सरकार अब वर्षों से सरकारी स्कूलों में बच्चों का भविष्य संवार रहे शिक्षकों को नौकरियों से बाहर का रास्ता दिखा रही है।नेताओं ने कहा कि पंजाब सरकार का यह फैसला देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा पिछले दिनों एक मामले के संबंध में की गई इस टिप्पणी कि ‘सरकारी नौकरी की समाप्ति कर्मचारी के लिए मौत के समान है’, को भी चुनौती देता है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के गांव गंभीरपुर में पिछले दस दिनों से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे शिक्षकों को टर्मिनेशन के आदेश भेजना सरकार के अहंकारी रवैये का स्पष्ट उदाहरण है।इस अवसर पर नेताओं ने कहा कि सरकार ने दिवाली के अवसर पर इन शिक्षकों के घरों में खुशियों के दीप जलाने के बजाय उनके भविष्य में अंधेरा भरने का काम किया है। यह कैसा इंकलाब है, जहां रोजगार देने के बजाय रोजगार छीना जा रहा है और न्याय मांगने वालों को नौकरी से निकालने के आदेश दिए जा रहे हैं?उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल 253 शिक्षकों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि उनके बच्चों,माता-पिता और परिवारों की आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा पर भी सीधा प्रहार करता है।

भर्ती प्रक्रिया के संबंध में नेताओं ने बताया कि अगस्त 2022 में मास्टर कैडर की भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी और दिसंबर 2022 में नाइलैट कंपनी द्वारा इसका परिणाम घोषित किया गया था। त्रुटियां होने के बावजूद पंजाब सरकार द्वारा 5 जनवरी 2023 को शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए।उत्तर कुंजी में त्रुटियां होने के कारण यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट के आदेश पर शिक्षा विभाग ने विभिन्न विश्वविद्यालयों के विषय विशेषज्ञों की एक समिति गठित करके नई संशोधित उत्तर कुंजी तैयार करवाई। इस उत्तर कुंजी के अनुसार नई चयन सूची तैयार करके मई 2023 में चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए और इन शिक्षकों को सरकारी स्कूलों में तैनात कर दिया गया।

भर्ती परीक्षा की उत्तर कुंजी में गलतियों का मामला हाईकोर्ट में पहुंचने के बाद न्यायालय के आदेशों के अनुसार गुरु नानक देव विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालयों के विषय विशेषज्ञों से संशोधित उत्तर कुंजी तैयार करवाई गई और उसके आधार पर नई चयन सूची बनाई गई।नेताओं ने सवाल किया कि यदि भर्ती प्रक्रिया में कोई कमी थी तो इसके लिए जिम्मेदार कंपनी, अधिकारियों और प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही तय करने के बजाय उन शिक्षकों को कटघरे में क्यों खड़ा किया जा रहा है, जिन्होंने सरकार द्वारा जारी नियुक्ति पत्रों के आधार पर अपनी सेवाएं शुरू की थीं? क्या सरकारी व्यवस्था की गलतियों की कीमत युवाओं को अपना रोजगार गंवाकर चुकानी पड़ेगी? क्या साढ़े तीन साल तक सरकारी स्कूलों में सेवाएं लेने के बाद सरकार की कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती? नेताओं ने कहा कि सरकार को अपनी नाकामियों का ठीकरा शिक्षकों के सिर नहीं फोड़ना चाहिए।

नेताओं ने मांग की कि 253 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने के फैसले पर पुनर्विचार करते हुए इसे तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि शिक्षकों के रोजगार और सम्मान के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो सरकार शिक्षकों को न्याय देने के बजाय उनकी आवाज दबाने वाले कदम उठाती है, उसे जनता के सवालों और शिक्षकों के संघर्ष का सामना करना पड़ेगा।अंत में समस्त शिक्षक संगठनों के नेताओं ने कर्मचारी वर्ग और न्यायप्रिय लोगों से प्रभावित शिक्षकों के पक्ष में आवाज बुलंद करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार तुरंत टर्मिनेशन के आदेश वापस ले, अन्यथा इन साथियों के चल रहे संघर्ष के समर्थन में और भी तीखे संघर्ष शुरू किए जाएंगे।इस अवसर पर अन्य लोगों के अलावा शिक्षक नेता विकास शर्मा, बलजीत महिमोवाल, मैडम रिम्पा, मैडम रज्जी, मैडम सोनिया, नरेंद्र कौर, नीलम राजू, शिक्षक सचिन गढ़दीवाला, प्रवीण कुमार, मैडम मधु, लेक्चरर नवल किशोर, मदन लाल, सरबजीत सिंह, नंद राम, दविंदर होशियारपुर, अश्वनी कुमार, सोमपाल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित थे।

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