
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। बच्चों में मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल और इसके उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक संगठनों की एक विशेष बैठक भारत विकास परिषद के अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी संजीव अरोड़ा के नेतृत्व में आयोजित की गई। बैठक में सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष आज्ञापाल सिंह साहनी, सन फाउंडेशन से प्रमुख शिक्षाविद् चंद्र प्रकाश सैनी तथा डिसेंट वेलफेयर सोसायटी से डॉ. पंकज शर्मा और मनजिंदर सिंह विशेष रूप से उपस्थित हुए। बैठक में बच्चों को मोबाइल के अनावश्यक इस्तेमाल से बचाने, उनमें पुस्तकों के प्रति रुचि विकसित करने तथा खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर संजीव अरोड़ा ने कहा कि आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन ज्ञान और सूचना का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई, एकाग्रता, शारीरिक सक्रियता और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को मोबाइल से पूरी तरह दूर रखने के बजाय उन्हें तकनीक का सही और सीमित उपयोग सिखाना आवश्यक है। इसके लिए माता-पिता को स्वयं भी मोबाइल का संतुलित इस्तेमाल करना चाहिए और बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताना चाहिए।
सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष आज्ञापाल सिंह साहनी ने कहा कि बच्चों का भविष्य केवल किताबी शिक्षा से ही नहीं, बल्कि अच्छे संस्कारों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से भी बनता है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान दें और उन्हें मोबाइल पर अधिक समय बिताने के बजाय खेलकूद, पुस्तकें पढ़ने तथा समाजोपयोगी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करें। बच्चों को प्यार और समझदारी से सही दिशा देना परिवार और समाज, दोनों की जिम्मेदारी है।
सन फाउंडेशन से प्रमुख शिक्षाविद् चंद्र प्रकाश सैनी ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में पढ़ाई के साथ-साथ एकाग्रता, रचनात्मकता और शारीरिक गतिविधियों का विशेष महत्व है। मोबाइल का अनियंत्रित इस्तेमाल बच्चों की अध्ययन संबंधी आदतों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों और घरों में बच्चों को पुस्तकें पढ़ने, खेलकूद, योग, संगीत और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाए। शिक्षकों और अभिभावकों के आपसी सहयोग से बच्चों में बेहतर आदतें विकसित की जा सकती हैं।
डिसेंट वेलफेयर सोसायटी से डॉ. पंकज शर्मा और मनजिंदर सिंह ने संयुक्त रूप से कहा कि बच्चों को मोबाइल की अनावश्यक आदत से बचाने के लिए परिवार और समाज को मिलकर प्रयास करने होंगे। केवल बच्चों को मोबाइल कम इस्तेमाल करने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बड़ों को भी अपने व्यवहार से उनके सामने अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि घर में भोजन के समय, पढ़ाई के दौरान और सोने से पहले मोबाइल के इस्तेमाल को सीमित करने जैसे छोटे-छोटे प्रयास सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं। बच्चों को डांटने के बजाय प्यार से समझाना, उनकी रुचियों को प्रोत्साहित करना और उनके साथ समय बिताना अधिक प्रभावी रहेगा।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बच्चों को तकनीक का सही उपयोग सिखाने के साथ-साथ उन्हें पुस्तकों, खेलकूद, पारिवारिक संवाद और अच्छे संस्कारों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। बच्चों को मैदान में खेलने, अच्छी पुस्तकें पढ़ने और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के अवसर दिए जाने चाहिए, ताकि उनका शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास संतुलित रूप से हो सके।
अंत में संजीव अरोड़ा ने अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और समाज के जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे बच्चों के लिए प्रतिदिन कुछ समय मोबाइल-मुक्त गतिविधियों हेतु निर्धारित करें। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही बच्चों में अच्छी आदतें विकसित की जा सकती हैं और उन्हें स्वस्थ, आत्मविश्वासी तथा जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में सार्थक कदम उठाए जा सकते हैं।










