
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में मुलाजिमों एवं पैनशरों का डीए-डीआर को लेकर जो हलफनामा दायर किया उससे सरकार की मंशा साफ हो गई है कि वह इसे खत्म करने की साजिश रच रही है। लेकिन जब तक देश में अदालतें हैं तब तक सरकार कर्मचारी विरोधी फैसला लेने का विचार भी मन में ला लाए। यह विचार मुलाजिम नेता कुलवंत सैनी ने इस संबंधी आज यहां जारी एक प्रैस विज्ञप्ति में कहे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि पंजाब सरकार मुलाजिमों-पैनशरों को साल में दो बार तथा केन्द्र सरकार के पैट्रन पर डीए देने के लिए पाबंद नहीं है। आगे से डीए देने संबंधी घोषणा या देने की तिथि सरकार का पालिसी डिसीजन है, जिसे सरकार के वित्तीय स्रोतों को ध्यान में रखते हुए लागू किया जाएगा।

सरकार का कहना कि महंगाई भत्ता देना कोई कानूनी जिम्मेदारी नहीं बल्कि ख्जाने की हालत पर निर्भर करता है, पूरी तरह से गैरजिम्मेदाराना और कर्मचारी विरोधी है। कुलवंत सैनी ने कहा कि जो सरकार पंजाब में विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है क्या उससे ख्जाने की हालत अच्छी हो रही है, क्या वह पंजाब और पंजाबियों पर वित्तीय बोझ नहीं है। उन्होंने कहा कि जब से आप की सरकार ने सत्ता संभाली है तब से इसने कर्मचारी विरोध फैसलों से कर्मचारी वर्ग का शोषण ही किया है। श्री सैनी ने कहा कि सरकार को अपनी इस गलती के लिए पछताना पड़ेगा तथा आने वाले समय में एक नहीं बल्कि तमाम कर्मचारी संगठन सरकार के विरोध में सड़कों पर होंगे और हम इन्हें बता देंगे कि अगर कर्मचारी सरकार बना सकते हैं तो उसे हटाने में भी इन्हें देर नहीं लगती तथा कर्मचारी अपना हक लेना जानते हैं।












