
दिल्ली (द स्टैलर न्यूज़)। केंद्र सरकार ने यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफार्मों पर स्वतंत्र समाचार और सामान्य मामलों की सामग्री बनाने वालों को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा। प्रस्तावित परिवर्तनों के तहत, ऐसे रचनाकार, जो पंजीकृत समाचार प्रकाशक नहीं हैं, सूचना और प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) के दायरे में आएंगे। इससे एमआईबी को सोशल मीडिया चैनलों पर होस्ट की गई सामग्री के लिए अवरोध आदेश जारी करने या समाचार प्रकाशकों के नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सामग्री को बदलने की आवश्यकता होगी। यह संशोधन अंतर-विभागीय समिति की भूमिका को बढ़ाता है, जिससे यह न केवल प्रकाशकों से संबंधित शिकायतों पर विचार कर सकेगी, बल्कि मंत्रालय द्वारा सीधे भेजे गए मामलों पर भी विचार कर सकेगी।

इससे ऑनलाइन सामग्री के औपचारिक राज्य समीक्षा के दायरे में आने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है, जिसमें ऐसी प्रक्रियाएं भी शामिल हैं जिनके परिणामस्वरूप सामग्री को हटाया या अवरुद्ध किया जा सकता है,” तकनीकी नीति थिंक टैंक ‘द डायलॉग’ के संस्थापक निदेशक काज़िम रिज़वी ने कहा। प्रस्तावित संशोधनों के मसौदे में यह भी कहा गया है कि सरकार द्वारा सोशल मीडिया मध्यस्थों को जारी की गई किसी भी सलाह का अनिवार्य रूप से पालन किया जाना चाहिए। प्रस्तावित संशोधन में कहा गया है कि इस तरह की सलाह, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत सुरक्षित आश्रय सुरक्षा बनाए रखने के लिए मध्यस्थों की उचित सावधानी संबंधी आवश्यकताओं का एक हिस्सा होगी।












