
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़), रिपोर्ट- नीरज धीमान। पंजाब सरकार ने राज्य के युवाओं को नशे की गर्त से बचाने और शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT), पंजाब ने शैक्षणिक संस्थानों में नशाखोरी को जड़ से खत्म करने के लिए ‘तीन वर्षीय कार्ययोजना (2026-2029)’ लागू करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है । भारत सरकार के गृह मंत्रालय और स्कूल शिक्षा व साक्षरता विभाग के निर्देशों के तहत तैयार की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य साल 2029 तक देश को पूरी तरह ‘नशामुक्त’ बनाना है ।

स्कूलों के बाहर लगेंगे ‘ड्रग-फ्री ज़ोन’ के बोर्ड
नई नीति के तहत, पंजाब के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के 500 मीटर के दायरे को ‘ड्रग-फ्री ज़ोन’ (नशामुक्त क्षेत्र) घोषित किया गया है । इस दायरे में नशे की किसी भी प्रकार की बिक्री या सेवन पर पूर्ण पाबंदी होगी। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि इस संबंध में स्कूलों के बाहर अनिवार्य रूप से साइन बोर्ड और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं ।
नियम तोड़ने वालों की खैर नहीं: तुरंत होगी पुलिस रिपोर्ट
योजना को कागजों से जमीन पर उतारने के लिए सख्त रिपोर्टिंग तंत्र विकसित किया गया है। यदि स्कूल के आसपास नशे से संबंधित किसी भी नियम का उल्लंघन पाया जाता है, तो स्कूल प्रमुख या नोडल अध्यापक के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे तुरंत स्थानीय पुलिस या संबंधित प्रशासन को इसकी सूचना दें । लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
नोडल अधिकारियों की होगी तैनाती
इस व्यापक अभियान के प्रभावी समन्वय के लिए जिला स्तर पर समर्पित नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी । ये अधिकारी स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन करेंगे और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट मुख्यालय को भेजेंगे। SCERT की निदेशक किरण शर्मा (PCS) ने राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि इस योजना को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए । यह अभियान 31 मार्च, 2026 से औपचारिक रूप से शुरू हो चुका है, जिसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ और नशामुक्त भविष्य प्रदान करना है ।












