
दिल्ली (द स्टैलर न्यूज़)। नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए तीन नए ‘मून बेस’ मिशनों की घोषणा की है। एजेंसी ने करीब 20 अरब अमेरिकी डॉलर की महत्वाकांक्षी योजना पेश की है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर स्थायी आधार (बेस) तैयार करना और वहां दीर्घकालिक संचालन की तकनीक विकसित करना है। नासा के प्रशासक जारेड आइजैकमैन ने मंगलवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अमेरिका एक बार फिर चंद्रमा की ओर लौट रहा है और यह मिशन मानवता की किसी अन्य खगोलीय दुनिया पर पहली स्थायी चौकी स्थापित करेगा। उन्होंने कहा, “अमेरिका चंद्रमा पर लौट रहा है। चंद्रमा बेस, किसी अन्य खगोलीय दुनिया पर अमेरिका और मानवता की पहली स्थायी चौकी होगा।”

नासा के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर लूनर रोवर और ड्रोन तैनात किए जाएंगे। इनके जरिए ऐसे प्रयोग किए जाएंगे, जो अंतरिक्ष के खतरनाक वातावरण में रहने और काम करने की तकनीक विकसित करने में मदद करेंगे। एजेंसी ने मार्च में चंद्रमा बेस स्थापित करने का लक्ष्य घोषित किया था और अब इसके लिए ठोस मिशन योजना सामने रखी गई है। नासा ने बताया कि ‘मून बेस-1’ मिशन के लिए Blue Origin के ‘ब्लू मून मार्क-1 एंड्योरेंस’ लैंडर का चयन किया गया है। यह मिशन सितंबर के बाद लॉन्च किया जा सकता है। इसके तहत ‘स्टीरियो कैमरा फॉर लूनर प्लूम-सर्फेस स्टडीज’ और ‘लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टिव एरे’ जैसे उपकरण चंद्रमा तक पहुंचाए जाएंगे। ये उपकरण इस बात का अध्ययन करेंगे कि लैंडर के थ्रस्टर चंद्रमा की सतह के साथ किस प्रकार प्रतिक्रिया करते हैं।
मिशन को चंद्रमा के ‘शैकलटन कनेक्टिंग रिज’ क्षेत्र में उतारने की योजना है, जहां 2028 में प्रस्तावित मानवयुक्त ‘आर्टेमिस’ मिशनों के लिए आवश्यक तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा। नासा ने बताया कि अप्रैल में चार अंतरिक्ष यात्री Artemis II मिशन के तहत चंद्रमा की सफल परिक्रमा कर चुके हैं। यह 1972 के Apollo 17 Moon Landing मिशन के बाद पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान थी, जिसने निचली पृथ्वी कक्षा से आगे यात्रा की। 1972 में जीन सर्नन और हैरिसन श्मिट चंद्रमा पर कदम रखने वाले अंतिम अंतरिक्ष यात्री थे। इस वर्ष के अंत में प्रस्तावित ‘मून बेस-2’ मिशन में Astrobotic के ‘ग्रिफिन’ लैंडर के जरिए 1,100 पाउंड से अधिक उपकरण और सामग्री चंद्रमा तक पहुंचाई जाएगी।
वहीं, ‘मून बेस-3’ मिशन के तहत चंद्रमा की सतह पर दिखाई देने वाले रहस्यमयी चमकीले घुमावदार निशानों, जिन्हें ‘लूनर स्वर्ल्स’ कहा जाता है, का अध्ययन किया जाएगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि इनका संबंध चंद्रमा की सतह के नीचे मौजूद चुंबकीय क्षेत्रों से हो सकता है। इस मिशन में European Space Agency और कोरियाई अंतरिक्ष एजेंसी के पेलोड भी शामिल होंगे। नासा के अनुसार, अगले तीन वर्षों में नई तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा और चंद्रमा की सतह पर संचालन की तैयारी की जाएगी। एजेंसी 2028 में प्रस्तावित Artemis III मिशन के लिए चंद्रमा पर चलने वाला विशेष वाहन भी उपलब्ध कराना चाहती है। कार्यक्रम के दूसरे चरण (2029-2032) में बिजली ग्रिड और अन्य स्थायी बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद तीसरे चरण में नियमित अंतरिक्ष यात्री दलों की अदला-बदली और सतत गतिविधियों के जरिए चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।












