Saturday, October 3, 2026
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आजादी का संकल्प: भारत के लिए कुछ करें

स्वतंत्रता दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि यह उस संकल्प को याद करने का दिन है, जिसके लिए असंख्य वीरों ने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। आज जब हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, तो हमारे सामने यह प्रश्न भी होना चाहिए कि इस स्वतंत्रता को हम कितनी जिम्मेदारी, जागरूकता और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।

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आज का भारत युवा भारत है। देश की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा पीढ़ी है। युवाओं के पास ऊर्जा है, प्रतिभा है, नई सोच है और तकनीक का ज्ञान है। यदि यही ऊर्जा सही दिशा में लग जाए तो भारत को दुनिया की अग्रिम पंक्ति में ले जाने की क्षमता रखती है। लेकिन इसके लिए युवा पीढ़ी को केवल अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग होना होगा।

वर्तमान समय में युवाओं के सामने अनेक चुनौतियाँ हैं—सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रभाव, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, मानसिक तनाव, दिखावे की संस्कृति, समय की बर्बादी और सफलता को केवल धन तथा प्रतिष्ठा से जोड़कर देखने की सोच। इन चुनौतियों के बीच युवाओं को विवेक से निर्णय लेना होगा। तकनीक का उपयोग ज्ञान और विकास के लिए हो, जीवन को भटकाने के लिए नहीं। प्रतिस्पर्धा हो, लेकिन संस्कारों की कीमत पर नहीं; सफलता मिले, लेकिन मानवीय संवेदनाएँ पीछे न छूटें।

राष्ट्र निर्माण केवल सीमा पर खड़े सैनिकों का दायित्व नहीं है। एक विद्यार्थी ईमानदारी से पढ़कर, एक युवा अपने कार्य में निष्ठा रखकर, एक व्यवसायी ईमानदारी से व्यापार करके, एक नागरिक कानून और अनुशासन का पालन करके तथा प्रत्येक व्यक्ति समाज के प्रति संवेदनशील बनकर राष्ट्रसेवा कर सकता है।

युवा यदि अपने आसपास की समस्याओं को समझे और उनके समाधान में छोटी-सी भूमिका भी निभाए, तो परिवर्तन निश्चित है। किसी जरूरतमंद विद्यार्थी की पढ़ाई में सहयोग करना, पर्यावरण की रक्षा करना, जल बचाना, स्वच्छता का ध्यान रखना, नशे से दूर रहना, बुजुर्गों का सम्मान करना, जीवों के प्रति करुणा रखना और समाज में प्रेम व सद्भाव बढ़ाना—ये सभी राष्ट्र के प्रति हमारी जिम्मेदारियाँ हैं।

भारत की वास्तविक शक्ति केवल उसकी अर्थव्यवस्था, तकनीक या सैन्य सामर्थ्य में नहीं, बल्कि उसके चरित्र, संस्कार, अहिंसा, करुणा और मानवीय मूल्यों में भी है। हमें ऐसा भारत बनाना है जो आधुनिकता में आगे हो, लेकिन अपनी संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ा रहे।

इस स्वतंत्रता दिवस पर मेरी युवा पीढ़ी से विशेष अपेक्षा है कि वह अपने जीवन का लक्ष्य केवल “मैं कितना आगे बढ़ूँ?” तक सीमित न रखे, बल्कि यह भी सोचे—”मेरी प्रगति से मेरा समाज और मेरा देश कितना आगे बढ़े?”

देश को बदलने के लिए किसी बड़े अवसर की प्रतीक्षा मत कीजिए। परिवर्तन की शुरुआत अपने घर, अपने व्यवहार और अपने विचारों से कीजिए। अपने समय का सदुपयोग कीजिए, अपने चरित्र को मजबूत बनाइए और अपनी प्रतिभा को राष्ट्रहित में लगाइए।

देश ने हमें बहुत कुछ दिया है; अब हमारी बारी है कि हम भी भारत को कुछ दें।

आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम संकल्प लें कि हम अपने ज्ञान, श्रम, प्रतिभा, समय और ऊर्जा का एक हिस्सा राष्ट्र के नाम समर्पित करेंगे। हम ऐसा भारत बनाने में योगदान देंगे जहाँ विकास के साथ संस्कार हों, शक्ति के साथ शांति हो, स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी हो और प्रगति के साथ मानवता हो।

याद रखिए—देश का भविष्य संसदों और संस्थानों में ही नहीं, युवाओं के विचारों, चरित्र और कर्मों में भी लिखा जाता है।

युवा जागेगा, तो भारत आगे बढ़ेगा।
युवा बदलेगा, तो भारत बदलेगा।
और जब युवा राष्ट्र के लिए कुछ करने का संकल्प लेगा, तब भारत विश्व में नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा।

-श्रमण डॉ पुष्पेंद्र

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