
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। संयुक्त परिवार प्रणाली में कभी बुजुर्गों और बीमार सदस्यों की एक ही छत के नीचे बेहतर देखभाल हो जाती थी, लेकिन आज के भौतिकवादी दौर में संयुक्त परिवार तेजी से टूट रहे हैं और न्यूक्लियर परिवारों का चलन बढ़ रहा है। इसके चलते घर में बीमार व्यक्ति या बुजुर्ग की देखभाल करना परिवार के सदस्यों के लिए चुनौती बनता जा रहा है।

जारी बयान में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अजय बग्गा ने कहा कि मेडिकल साइंस में लगातार हो रही प्रगति के कारण मानव जीवन प्रत्याशा बढ़ी है, जिसके साथ बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारियों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में बुजुर्गों और घर पर रह रहे मरीजों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित एवं सेवा भावना रखने वाले लोगों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
डॉ. बग्गा ने कम पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं से अपील की कि वे मरीजों और बुजुर्गों की देखभाल को एक सम्मानजनक व्यवसाय के रूप में अपनाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि यह न केवल उचित आमदनी का साधन बन सकता है, बल्कि जरूरतमंद लोगों के लिए जीवन रेखा साबित होने के साथ-साथ आत्मसंतोष और सम्मान भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सेवा भावना से किया गया यह कार्य समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस पेशे के बारे में यही कहा जा सकता है कि “नाले पुण्य, नाले फलियां”, यानी सेवा के साथ रोजगार और दूसरों की दुआएं भी हासिल होती हैं।












