
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। भारत विकास परिषद के अध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी संजीव अरोड़ा ने डॉटर्स डे के अवसर पर देश की सभी बेटियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बेटियां परिवार की खुशी, शक्ति और गौरव होती हैं। उनकी मुस्कान से घर में खुशियां आती हैं और उनकी उपलब्धियां पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर देती हैं। उन्होंने कहा कि बेटियां केवल एक घर की रौनक नहीं होतीं, बल्कि अपने प्यार, प्रतिभा, संस्कार और उपलब्धियों से दो परिवारों को रोशन करती हैं। अरोड़ा ने कहा कि आज की बेटियां शिक्षा, चिकित्सा, प्रशासन, खेल, विज्ञान, व्यवसाय, कला और सामाजिक सेवा सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रही हैं। इसलिए समाज और परिवार का दायित्व है कि बेटियों को समान अवसर, अच्छी शिक्षा, सुरक्षित वातावरण, आत्मनिर्भर बनने का अधिकार और अपने सपनों को पूरा करने का पूरा प्रोत्साहन दिया जाए।

उन्होंने कहा कि बेटी दिवस केवल बेटियों को शुभकामनाएं देने का अवसर नहीं, बल्कि यह संकल्प लेने का भी दिन है कि बेटियों को कभी भी अवसरों की कमी महसूस न होने दी जाए। माता-पिता बेटियों को मजबूत आत्मविश्वास दें और उन्हें अपने फैसले समझदारी से लेने के योग्य बनाएं। संजीव अरोड़ा ने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार और जीवन-मूल्य भी बच्चों के व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बेटियों को जहां अपने माता-पिता और परिवार के प्रति प्रेम एवं सम्मान की भावना रखनी चाहिए, वहीं बेटों को भी परिवार की जिम्मेदारियों, घरेलू कार्यों और बुजुर्गों की सेवा में बराबर सहयोग करने की सीख दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि घर के काम और परिवार की जिम्मेदारियां किसी एक की नहीं, बल्कि परिवार के सभी सदस्यों की साझा जिम्मेदारी हैं।उन्होंने कहा कि विवाह के बाद बेटी जब नए परिवार में जाती है तो अपने साथ मायके की यादें, संस्कार और प्यार लेकर जाती है। यदि ससुराल में उसे बेटी की तरह स्नेह, सम्मान और विश्वास मिले और वह भी नए परिवार को अपनत्व दे, तो दो परिवारों के बीच रिश्ते और मजबूत होते हैं। रिश्तों की खूबसूरती किसी एक पक्ष की जिम्मेदारी से नहीं, बल्कि दोनों तरफ से दिए गए सम्मान, सहयोग और समझ से बनती है।
संजीव अरोड़ा ने कहा कि आज के समय में माता-पिता को बेटियों को केवल अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए ही नहीं, बल्कि जीवन के व्यवहारिक कौशल, आत्मनिर्भरता, संवेदनशीलता, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए भी तैयार करना चाहिए। इसी प्रकार बेटों को भी अच्छे संस्कार और जिम्मेदार नागरिक बनने की शिक्षा देना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि “बेटी घर की लक्ष्मी” कहना तभी सार्थक होगा, जब उसे सम्मान के साथ समान अवसर भी मिलें। बेटी को प्यार के साथ शिक्षा, विश्वास के साथ स्वतंत्रता और संस्कारों के साथ अपने सपनों को पूरा करने का अवसर देना ही वास्तविक बेटी सम्मान है।श्री अरोड़ा ने डॉटर्स डे पर सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों की उपलब्धियों पर गर्व करें, उनके सपनों को समझें और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए निरंतर प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि जिस समाज की बेटियां शिक्षित, सुरक्षित, संस्कारित और आत्मनिर्भर होती हैं, उस समाज का भविष्य भी मजबूत और उज्ज्वल होता है।












