Sunday, October 18, 2026
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साध संगत आनंद का स्त्रोत होता है : महात्मा अजमेर संधू

होशियारपुर/गढ़दीवाला,(द स्टैलर न्यूज़),रिपोर्ट: गुरजीत सोनू। साध संगत आनंद का स्त्रोत होता है, जिसमें आकर सिर्फ आनंद ही आनंद मिलता है, जो संगत के साथ गुरसिख जुड़ा रहता है वह भवसागर से पार हो जाता है। उक्त बात जोनल इंचार्ज महात्मा अजमेर सिंह संधू जी ने संत निरंकारी सत्संग भवन गढ़दीवाला में ब्रांच के इंचार्ज महात्मा अवतार सिंह के नेतृत्व में आयोजित संत समागम के दौरान प्रकट किए। उन्होंने कहा कि संगत से इंसान को अच्छी रंगत चढ़ती है, अच्छे गुण प्रवेश होते है। उन्होंने कहा कि संतों की संगत को हमेशा ही ऊंचा दर्जा मिला है, इसलिए साध संगत कभी भी नहीं छोडऩी चाहिए।

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साध संगत की महत्ता हमारे धार्मिक ग्रंथो में भी की गई है। उन्होंने सुख व दुख के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि इस परमात्मा को जानकर इस दुनिया में आने का उद्देश्य पूरा करके परमात्मा की सिमरन करना सुख है जबकि मानुष जन्म पाकर परमात्मा को जाने बिना ही संसार से चले जाना इंसान का सबसे बड़ा दुख है क्योंकि इंसान फिर से चौरासी लाख योनियों में चला जाता है। जन्म लेना व मरना सबसे बड़ा दुख है। उन्होंने कहा कि सतगुरु हमेशा इस परमात्मा के साथ जोड़ता है। इस दौरान गढ़दीवाला ब्रांच के इंचार्ज महात्मा अवतार सिंह ने महात्मा अजमेर सिंह संधू को दुपट्टा पहना कर उनका धन्यवाद किया।

इस मौके पर मंच सचिव की भूमिका पूर्व डी.पी.आर.ओ. गुरमीत सिंह धुगगा कलां ने अदा की। इस मौके पर कैप्टन तरलोक सिंह, राजिंदर सिंह बटाला, महात्मा राम प्रकाश धूतकलां,जसपाल सिंह, महात्मा सरूप सिंह क्षेत्रीय संचालक, मुखतैयार सिंह आदि सहित अन्य संत महापुरुषों ने भी अपने विचार पेश किए।

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