Sunday, November 1, 2026
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जिले को नशा मुक्त करने में नहीं छोड़ी जा रही है कोई कमी: डिप्टी कमिश्नर

होशियारपुर, (द स्टैलर न्यूज़)। डिप्टी कमिश्नर अपनीत रियात ने बताया कि जिले को नशामुक्त  करने के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रही ओ.ओ.ए.टी क्लीनिक, नशामुक्ति  व पुर्नवास केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार पहले ही जिले में दो सरकारी नशा छुड़ाओ केंद्र सिविल अस्पताल होशियारपुर व सिविल अस्पताल दसूहा में चला रही है, इसके अलावा 6 प्राइवेट नशा छुड़ाओ केंद्र भी चलाए जा रहे वहीं एक नशामुक्ति  पुर्नवास केंद्र मोहल्ला फतेहगढ़ मेें चलाया जा रहा है। इन केंद्रों में हर तरह के नशे के मरीजों को 1-3 महीने तक दाखिल कर दवाईयां, काउंसलिंग व अन्य गतिविधियों से नि:शुल्क इलाज किया जाता है। उन्होंने कहा कि जिले को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है।

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डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि  मई 2018 से सरकार की ओर से जिले में ओ.ओ.ओ.ए.टी क्लीनिक  शुरु  की गई है, जिसमें पोस्त से बनने वाले या उस जैसे असर वाले नशे जैसे कि हैरोइन(चिट्टा), अफीम, भुक्क ट्रैमाडोल, प्रौकसी वन कैप्सूल, लोमोटिल गोलियां आदि से ग्रस्त मरीजों का इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि जिले में कुल 17 ओ.ओ.ए.टी. क्लीनिक व 3 ओ.एस.टी क्लीनिक है। उन्होंने बताया कि ओ.ओ.ए.टी, ओ.एस.टी क्लीनिक व नशा छुड़ाओ केंद्रों की बात करें तो रोजाना इन केंद्रों में 3500 के करीब मरीज आते हैं। उन्होंने बताया कि ओ.ओ.ए.टी. क्लीनिकों में अभी तक 6978 रजिस्ट्रेशन हो चुकी है ,जिनमें से 2528 मरीज इलाज करवा चुके हैं। इसके अलावा 994 के करीब मरीज घरों के लिए दवाईयां लेकर जाते हैं व 715 मरीज मिनिमम डोज पर हैं, जिनका इलाज लगभग पूरा हो गया है।  

अपनीत रियात ने बताया कि नशामुक्ति  पुर्नवास केंद्र मोहल्ला फतेहगढ़ में अब तक 840 मरीजों का इलाज किया जा चुका हैं और बहुत से मरीजों को ठीक करने के बाद उनके पुर्नवास के लिए कार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि नशा छुड़ाओ केंद्रों व पुर्नवास केंद्र में अब मरीजों के लिए 148 सैमिनार करवाए जा चुके हैं, जिनमें 9363 मरीजों ने हिस्सा लिया है। उन्होंने बताया कि मरीजों का इलाज डाक्टर व काउंसलर की सीधी देखरेख में किया जा रहा है और इनकी निगरानी में ही उनको दवाई भी दी जाती है। उन्होंने बताया कि मरीज को डाक्टर व काउंसलर की मदद व उसके वारिसों के सहयोग से एक साल के भीतर नशा मुक्त  करने का प्रयास किया जा रहा है और जिले में इसके सार्थक परिणाम सामने आ रहे हैं।

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