
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में साप्ताहिक सत्संग के दौरान भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि हम योग की बातें तो करते हैं लेकिन योग नहीं करते। यह सिलसला सालों साल से चला आ रहा है। यही हमारे जीवन की कड़वी सच्चाई है। जीवन की उन्नति के लिए भगवान ने हमें एक अवसर दिया है। प्रभु जी हमें हठयोग, राजयोग और बुद्धि योग की शिक्षा देते हैं। हठ योग के सात साधन हैं। पहला षट्कर्म है। इससे शरीर ठीक रहेगा। शरीर के बिना तो राजयोग भी नहीं होगा। नेति, धोती, त्राटक, कपालभाति आदि इसी के तहत आते हैं।

जलनेति के बाद सूत्र नेती भी करनी चाहिए। हम जल नेति से आगे ही नहीं बढ़ पाते। अगर बमन करते हैं तो धोती भी करो। नोली भी करो,शंखप्रक्षालन भी करो। अगर शरीर ही ठीक नहीं होगा तो फिर ध्यान कैसे लगाएगा। योग के साधन सुनने से नहीं करने से आते हैं। हठयोग के तहत ही प्राणायाम आता है। लेकिन हम तो कुंभक भी नहीं कर पाते। जितना सांस अंदर ले जाकर रोकोगे उतना ही हमारे फेफड़ों को लाभ होगा।जिस प्रकार प्राण और दिल का संबंध है इस तरह दिल और फेफड़ों का संबंध है। हमारा ध्यान चलते फिरते भी भगवान की तरफ नहीं रहता बल्कि दुनिया के कामों की तरफ रहता है। राजयोग कहता है कि हर समय भगवान को याद करो। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को राजयोग की शिक्षा देते कहां की तुम कर्म करते हुए मुझे याद करो। अर्जुन तुम युद्ध मैदान में लडो पर लड़ते-लड़ते मुझे भी याद करो। लेकिन दुख की बात है कि आज अधिकतर लोग आत्म समर्पण नहीं कर पाते।
वह बुराई का अथवा अन्याय का सामना ही नहीं करते। बुद्धि योग कहता है कि जब तक संसार की तरफ से पीठ नहीं मोड़ोगे ध्यान नहीं लगेगा। योग कर्म सिखलाता है।शरीर को लचीला रखने के लिए सर्पासन,धनुरासन, वज्रासन, आदि साधन करो शरीर भी ठीक रहेगा। फोटो कैप्शन: भगवान की आरती उतारते मुख्य आचार्य चंद्रमोहन जी।












