Monday, October 12, 2026
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दुनिया का कोई भी दूध मां के दूध की जगह नहीं ले सकता: सिविल सर्जन

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार आज सिविल सर्जन डॉ. बलविंदर कुमार ने “मां दे दूध दी महत्ता” सप्ताह की शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने इससे संबंधित पोस्टर भी जारी किया। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सीमा गर्ग, सहायक सिविल सर्जन डॉ. कमलेश कुमारी, जिला परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. अनीता कटारिया, डिप्टी मास मीडिया ऑफिसर डॉ. तृप्ता देवी, डिप्टी मास मीडिया ऑफिसर रमनदीप कौर और अन्य स्टाफ उपस्थित थे। ‘क्लीयर द गैप’ थीम के तहत मनाए जा रहे इस सप्ताह के बारे में सिविल सर्जन ने कहा कि दुनिया का कोई भी दूध मां के दूध की जगह नहीं ले सकता। मां का दूध बच्चे के लिए संपूर्ण पौष्टिक आहार है। इसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी तत्व मौजूद होते हैं। जन्म के आधे घंटे बाद मां को अपने बच्चे को दूध पिलाना चाहिए और सीजेरियन सेक्शन (बड़े ऑपरेशन) के चार घंटे बाद स्तनपान शुरू करना चाहिए। प्रथम 06 माह तक केवल माँ का दूध ही देना चाहिए। 6 महीने के बाद दूध के साथ केला, खिचड़ी, दही और उबले आलू जैसे अन्य आहार देना शुरू कर देना चाहिए। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सीमा गर्ग ने बताया कि बच्चे को कभी भी बोतल से दूध नहीं पिलाना चाहिए क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा रहता है। जो महिलाएं स्तनपान कराती हैं वे अधिक स्वस्थ होती हैं, बच्चे को जन्म देने के तीन साल बाद गर्भवती होने की संभावना कम होती है, और स्तन एंव अंडेदानी के कैंसर होने की संभावना कम होती है। डॉ. सीमा ने कहा कि गुड़ती देने की प्रथा को समाज से खत्म किया जाना चाहिए, क्योंकि यह बच्चों में संक्रमण का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि किसी भी संक्रामक रोग से पीड़ित व्यक्ति को बच्चे के पास नहीं जाने देना चाहिए, क्योंकि छोटा बच्चा इसके प्रति संवेदनशील होता है और संक्रामक रोग उस पर बहुत जल्दी असर करते हैं। नवजात शिशु के लिए मां का दूध सबसे अच्छा भोजन है, यह बच्चे की सभी जरूरतों को पूरा करता है। मां के दूध के महत्व को न जानने के कारण हर साल बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हो जाती है। शिशु को मां के दूध के अलावा 6 माह तक पानी नहीं पिलाना चाहिए क्योंकि मां के दूध में पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है। यदि बच्चा छह माह तक ठीक से मां का दूध पीता रहे तो उसे किसी अन्य आहार की जरूरत नहीं होती।

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डिप्टी मास मीडिया ऑफिसर डॉ. तृप्ता देवी ने कहा कि नवजात शिशु को अपना दूध पिलाना न केवल शिशु के लिए फायदेमंद होता है, बल्कि माताओं में स्तन कैंसर और हड्डियों की कई बीमारियों से बचाने के साथ-साथ शरीर में जमा वसा को भी कम करता है माँ के स्वास्थ्य और खुशहाली में भी सहायक और बहुत योगदान देता है, लेकिन यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षित परिवारों में माँ के दूध के महत्व के बारे में जागरूकता की कमी है। शिक्षित माताएं अपने बच्चों को फॉर्मूला दूध पिलाना अपनी शान मानती हैं जो कि एक गलत चलन है। इस तरह के जागरूकता सप्ताह मनाने का असली उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करना है ताकि स्वस्थ बच्चों के साथ एक स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सके।

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