
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। जिले के गांव चक्क बामू निवासी 23 वर्षीय किसान प्रीतपाल सिंह ने 70 एकड़ जमीन पर खेती का अनोखा तरीका अपनाया है, जिसमें से अधिकांश भूमि वे ठेके पर लेकर बगैर पराली जलाए फसल उगाते हैं। उनकी खास बात यह है कि वे पिछले 4 वर्षों से बिना पराली जलाए खेतों में धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई करते आ रहे हैं। इसके लिए वे धान के अवशेषों को हटाए बिना सीधे उन पर गेहूं के बीज का छिड़काव करते हैं और फिर कटर की मदद से बुवाई करते हैं। प्रीतपाल सिंह का कहना है कि इस तरीके से न केवल खेतों में खरपतवार कम होती है बल्कि फसल का उत्पादन भी परंपरागत खेती के मुकाबले बेहतर रहता है। इसके साथ ही, खेती की लागत में भी कमी आती है। शेष 34 एकड़ में, जहां धान की पराली को जलाने की जरूरत महसूस होती थी, वे सुपर सीडर तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तकनीक की मदद से वे बिना पराली जलाए गेहूं की बुवाई सफलतापूर्वक कर रहे हैं।

प्रीतपाल सिंह प्राकृतिक खेती के प्रबल समर्थक हैं। वे 10 एकड़ भूमि में सब्जियों की खेती करते हैं और साथ ही डेयरी व्यवसाय भी करते हैं। उनका मानना है कि प्राकृतिक खेती से न केवल भूमि की उपजाऊ शक्ति बरकरार रहती है बल्कि पर्यावरण का भी संरक्षण होता है। उनकी मेहनत और सूझबूझ के चलते उन्होंने अपने खेतों में गन्ने के अवशेषों का भी उपयोग करना शुरू किया है। गन्ने की बची हुई सामग्री को इकट्ठा करके मल्चिंग के रूप में उपयोग करते हैं, जिससे मिट्टी की नमी बनी रहती है और खेतों की उर्वरता में सुधार होता है। प्रीतपाल सिंह अपने खेती के अनुभवों से दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं। वे किसानों को प्राकृतिक खेती के फायदे बता रहे हैं और उन्हें इस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि मेहनत और सूझबूझ के साथ खेती और सहायक धंधों का सही तालमेल ही खेती को सफल बना सकता है।












